सामाजिक विवाह में संविधान की प्रति भेंट

गोंड़ समाज पदाधिकारियों की सार्थक पहल

– राजशेखर नायर

नगरी: बाबा साहब अम्बेडकर द्वारा भारतीय संविधान में सदियों से पिछड़े-शोषित-वंचित अनुसूचित जन जातियों  के लिए जल जंगल जमीन का मालिकाना हक,  एट्रोसिटी एक्ट, वनाधिकार कानून, पेसा कानून, छठी अनुसूची, आरक्षण, शिक्षा एवं अन्य संवैधानिक अधिकार की व्यवस्था दी गई है।

इन्हीं संवैधानिक अधिकारों के कारण आदिवासी समाज बचा हुआ है। जिला गोड़ समाज के उपाध्यक्ष महेन्द्र नेताम एवं महिला जिलाध्यक्ष दिनेश्वरी नेताम ने समाजिक शादी व अन्य समारोह में विभिन्न सामग्री भेंट करने के बजाय भारत का संविधान की प्रति भेंट करने की पहल किये हैं।

उन्होंने कहा कि आज हर आदिवासी परिवार में संविधान की प्रति रखने की आवश्यकता है।  आज आदिवासी समाज का वजूद खतरे में है आदिवासी समाज एवं उनके संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।

समाज का प्रत्येक व्यक्ति संविधान का अध्ययन कर अपने संवैधानिक अधिकार के प्रति सजग हो। इसी के पालन स्वरूप सबसे पहले धमतरी जिला गोड़ समाज के अध्यक्ष शिवचरण नेताम के पुत्र की शादी में वर-वधु को संविधान की प्रति भेंट की गई। साथ ही सभी सगाजनों से निवेदन किया कि विवाह आदि में निरर्थक समान टिकने के बजाय यथासंभव संविधान की प्रति भेंट करें।

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