छत्तीसगढ़

कोरोना काल ने छोटे व्यवसाइयों की तोड़ी कमर,धन्धे पर दिखा आर्थिक मंदी का असर

ग्राहकों के अभाव में दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहता है

अरविन्द 

कटघोरा : जहाँ कोविड 19 कोरोना वायरस ने पूरे विश्व मे तबाही का आलम बिखेरा है इस दौरान हुए लाग डाउन से पूरी अर्थ व्यवस्था डगमगा गई है वही इसका खासा असर जिला कोरबा के कटघोरा शहर में भी दिखाई दिया है।यहाँ के छोटे व्यवसायियों पर इसका सीधा असर हुआ है।कई महीनों से लाग डाउन रहने के कारण पूरा व्यापार ठप्प की कगार पर जा खड़ा हुआ है।

दुकानों पर सन्नाटा पसरा

लाग डाउन में सरकार ने जैसे ही राहत देने का शिलशिला प्रारम्भ किया है तो यहाँ की दुकानों के पट तो खुलने शुरू हो गए हैं लेकिन ग्राहकों के अभाव में दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहता है कभी कभी तो बोहनी तक नही हो पा रही है।केवल सुबह दुकाने खुल जाती है और शाम को बन्द हो जाती हैं।

इस पूरे हालातों के बीच सबसे बड़ी समस्या का सामना उन छोटे व्यवसाइयों को करना पड़ रहा है जो रोज अपनी दुकान सड़क किनारे लगा कर सामानों की बिक्री कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।इनके पास न तो कोई जमा पूंजी है और न ही कोई बड़ा व्यापार।लाग डाउन में जैसे तैसे इन्होंने अपने परिवार का भरण पोषण किया है और अब लाग डाउन में राहत मिल गई है तो इनको अपने धन्धे की चिंता सताने लगी है

पैसों के तंगी की मार झेल रहे इन व्यवसाइयों के पास इतने पैसे भी नही है कि वे अपने व्यवसाय को पूर्व की भांति सुचारू रूप से कर सके।इन्ही छोटे व्यवसाइयों की वजह से बाजारों में रौनक बनी रहती है इनसे ग्रामीण छेत्रो के लोगों को कम दर पर उपयोगी सामाग्री बड़ी आसानी से मिल जाती है पर आज इनकी माली हालत ऐसी हो चुकी है कि ये सामानों की वैरायटी तक नही जुटा पा रहे हैं।जिस वजह से इनके ऊपर पारिवारिक पालन पोषण की बड़ी समस्या बनी हुई है।

अब सरकार इन छोटे व्यवसाइयों की किस प्रकार से राहत मुहैया कराएगी यह एक सोचनीय विषय जरूर हो सकता है।पूर्व से ही ये कर्जे की मार झेल रहे हैं अब लाग डाउन के दौरान इनके ऊपर भारी संकट बना हुआ है।कई व्यवसाइयों ने तो अपने धन्धे बन्द कर दिए हैं और रोजी मजदूरी की ओर रुख कर चुके हैं।

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