राष्ट्रीय

सैकड़ों लोगों की सेवा में लगा डॉक्टर हुआ कोरोना संक्रमित, मौत

किसान पिता ने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी थी

नई दिल्ली: दिल्ली के भीम राव अंबेडकर अस्पताल में काम करने वाले एक रेजिडेंट डॉक्टर की कोरोना वायरस के चलते मौत हो गई। डॉक्टर एक महीने से आईसीयू में भर्ती थे।जोगिंदर जून के आखिरी हफ्ते में कोरोना वार्ड में ड्यूटी करते वक्त कोरोना से संक्रमित हो गए थे।

पहले उन्हें दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में दाखिल कराया गया, यहां प्लाज्मा थेरेपी के जरिए भी इलाज किया गया लेकिन हालात में कुछ सुधार न देखते हुए जोगिंदर के परिवार वालों के कहने पर गंगाराम अस्पताल में शिफ्ट किया गया। यहां 5 जुलाई से उनका इलाज चल रहा था लेकिन अंत में कोरोना वायरस से लड़ते हुए वो शहीद हो गए।

डॉक्टर मध्यप्रदेश के नीमच जिले के रहने वाले थे। उनके किसान पिता ने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी थी। परिवार हंसते खेलते जोगिंदर के अचानक चले जाने के कारण सदमे में है।

अंबेडकर अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर ने कहा कि जोगिंदर से जब फोन पर बात होती थी, तो कहता था जल्द ही काम पर लौटूंगा। उसके दोस्तों ने बताया कि जोगिंदर काफी सहज और सरल व्यक्ति थे। एक छोटे से गांव से उन्होंने दिल्ली तक का सफर तय किया था। किसान परिवार से होने के चलते आर्थिक हालात ज्यादा अच्छे नहीं थेपिता ने लोन लेकर उनकी पढ़ाई पूरी कराई थी। 27 साल की छोटी उम्र में डॉक्टर भी बन गए थे और टॉपर थे।

जिस वक्त डॉ. जोगिंदर की मौत हुई, उस वक्त उनका इलाज दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में चल रहा था। आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते दिवंगत डॉक्टर का परिवार बिल चुकाने में सक्षम नहीं था जिसके बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा डॉक्टर के इलाज का पूरा बिल माफ कर दिया गया है।

साथी डॉक्टर्स का कहना है कि जोगिंदर ने कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने अपना बलिदान दिया है। डॉक्टरों की सरकार से मांग है कि उन्हें कोरोना योद्धा घोषित कर परिजनों को मुआवजा दिया जाए। बात दे कि राजधानी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में अब तक करीब 24 स्वास्थ्य कर्मियों की संक्रमण से मौत हो चुकी है।

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button