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नौ दिनों के बाद संक्रमण नहीं फैला सकता कोरोना संक्रमित मरीज: रिसर्च

मेडिकल सुविधाएं मिलने से ज्यादा लोगों को हो सकेगा फायदा

नई दिल्ली: नौ दिन बाद कोरोना वायरस मरीज के शरीर में मौजूद तो रहता है लेकिन इससे प्रसार नहीं होता. नौ दिन बाद कोरोना वायरस का कान, नर्व सिस्टम और दिल पर असर बना रहता है. लेकिन यह एक तरीके से बेअसर हो जाता है. यह खुलासा ब्रिटेन में हुए अध्ययन में हुआ है.

कोरोना रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना मरीज़ के संक्रमित होने के 17 से 83 दिनों के बीच वायरस मरीज़ के गले में पहुंच जाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये नतीजे हॉस्पिटल में मरीज को जल्द डिस्चार्ज करने में मददगार साबित होंगे और मेडिकल सुविधाएं मिलने से ज्यादा लोगों को फायदा हो सकेगा.

शोधकर्ता मुगे केविक और एंटोनिया हो का कहना है कि संक्रमित होने के पहले हफ्ते में मरीज़ के अंदर लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं. इसका मतलब है कि जब तक उनका टेस्ट किया जाता है, तब तक वे संक्रामक के सबसे बुरे दौर को पार कर चुके होते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसलिए जैसे ही आपको पता चले कि आप संक्रमित हो, तो आपको तुरंत ही आइसोलेट हो जाना चाहिए. बिना लक्षण वाले लोग भी संक्रमित होने के तुरंत बाद सबसे अधिक संक्रामक होते हैं.

डॉक्टरों का मानना है कि कोरोना के गंभीर मरीज़ जो हफ्तों तक वेंटिलेटर पर रहते हैं, उन्हें कमज़ोरी और मांसपेशियों में दर्द का सामना करना पड़ेगा. लंबे समय तक संक्रमित रहने वाला व्यक्ति अंदर से काफी कमज़ोर हो जाता है.

ब्रिटेन के एक बड़े अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि COVID-19 के साथ उनके आईसीयू के मरीज़ों का एक महत्वपूर्ण अनुपात “एक्सोनल मोनोअनुराइटिस मल्टीप्लेक्स” नामक एक तंत्रिका विकसित करता है, जिसमें गंभीर दर्द, संवेदना की हानि और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत होती है. डॉक्टरों का कहना है कि हमारा अनुभव बताता है कि कोरोना से ठीक होने वाले मरीज़ों में इस तरह की परेशानी आम है.

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