कोरोना के प्रहार से यूरोप बुरी तरह प्रभावित, फसलों को हो रहा भारी नुकसान

जैतून के पेड़ों की कीमत 20 बिलियन यूरो से भी ज्यादा आंकी गई

रोम: घातक COVID-19 कोरोना वायरस के प्रहार से यूरोप बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, यहाँ फसलों को भारी नुकसान हो रहा है. खास कर जैतून के पेड़ों को. यूरोप में घातक पैथोजन से प्रभावित हुए जैतून के पेड़ों की कीमत 20 बिलियन यूरो से भी ज्यादा आंकी गई है.

शोधकर्ताओं की टीम ने इटली, स्पेन और ग्रीस को लेकर अनुमान लगाए हैं. यूरोपीय जैतून के तेल उत्पादन का 95 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों से आता है. इस स्टडी को प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस) के जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

स्टडी के मुताबिक, अकेले स्पेन में ही आने वाले 50 सालों में 17 बिलियन यूरो का नुकसान हो सकता है. इटली में इसी तरह 5 बिलियन यूरो से ज्यादा का नुकसान होगा जबकि ग्रीस में घाटा दो बिलियन से कम होगा. जायलेला फास्टिडिओसा नाम का रोगजनक, पौधों का रस चूसने वाले कीड़ों द्वारा फैलता है.

जिस जीवाणु ने इटली में पेड़ों की कतारें खत्म कर दीं. उसी तरह का संभावित खतरा अब स्पेन और ग्रीस में जैतून के पेड़ों पर मंडरा रहा है. शोधकर्ताओं ने बीमारी से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों का विश्लेषण किया है और पता ये चला है जैतून के तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं.

जायलेला को दुनिया भर के पौधों के लिए सबसे खतरनाक रोगजनकों में से एक माना जाता है. यह चेरी, बादाम और बेर के साथ-साथ जैतून को भी संक्रमित कर सकता है. वर्तमान में इस संक्रमण का कोई इलाज नहीं है.

जिससे पेड़ों की पानी और पोषक तत्वों को खींचने की क्षमता को सीमित किया जा सके. नतीजा ये होता है कि समय के साथ पेड़ सूख जाता है और मर जाता है. इटली के अलावा जायलेला जीवाणु अब स्पेन, फ्रांस और पुर्तगाल में पाया गया है.

Tags
Back to top button