कोरोना वैक्सीन के लिए 10 साल डायबिटीज और आठ महीने पुराने कैंसर का होना जरूरी

राज्य स्तरीय मेडिकल काउंसिल से पंजीकृत डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र देना जरूरी

नई दिल्ली:देश में एक मार्च से कोरोना का दूसरा टीकाकरण शुरू हो रहा है। 45 से 59 वर्ष आयु के बीच उन्हीं लोगों को वैक्सीन मिल सकेगा जिन्हें पहले से कोई बीमारी है और कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा इन्हें हो। इसके लिए बकायदा राज्य स्तरीय मेडिकल काउंसिल से पंजीकृत डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र देना जरूरी है।

सरकार ने 20 तरह की बीमारियों की सूची बनाई है जिनसे ग्रस्त रोगियों को ही वैक्सीन मिलेगा। इतना ही नहीं डॉक्टर द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र का प्रारुप भी सरकार ने जारी कर दिया है। सूची के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिन्हें पिछले एक वर्ष के दौरान हार्ट अटैक आया हो और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया हो तो उन्हें वैक्सीन मिल सकता है।

ठीक इसी तरह पिछले दो वर्ष में गंभीर श्वास रोगी (अस्पताल में भर्ती) भी योग्य हैं। अगर व्यक्ति को केवल डायबिटीज की शिकायत है तो डॉक्टर को सबसे पहले देखना होगा कि डायबिटीज 10 वर्ष से अधिक समय से है अथवा नहीं?

अगर नहीं है तो अनियंत्रित स्थिति में होने पर ही वैक्सीन मिलेगा। इसके अलावा एक जुलाई 2020 के बाद से जिन मरीजों में कैंसर की पहचान हुई है और जो मरीज कैंसर की थैरेपी वर्तमान में ले रहे हैं केवल उन्हें ही वैक्सीन उपलब्ध कराया जा सकता है।इनके अलावा दिल, किडनी, लिवर की सभी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को सूची में शामिल किया है।

सिकलसेल, थैलेसीमिया, एचआईवी रोगी भी इसमें हैं। जो रोगी लिवर, किडनी या फिर स्टेम सेल प्रत्यारोपण की स्थिति में हैं या फिर वेटिंग में, उन्हें भी वैक्सीन मिलेगा। यह प्रत्यारोपण करा चुके रोगी भी लाभार्थी होंगे। हाइपरटेंशन के वे रोगी जिनका इस समय उपचार चल रहा है वह वैक्सीन ले सकते हैं। स्ट्रोक के रोगियों के लिए सीटी स्कैन या एमआरआई जांच रिपोर्ट दिखाना जरूरी है।

बौद्धिक दिव्यांगता को भी मिलेगा वैक्सीन

सरकार ने कोरोना वैक्सीन के लिए जिस आयु वर्ग को तय किया है अगर उसमें कोई बौद्धिक दिव्यांगता से पीड़ित है तो उसे भी प्राथमिकता मिलेगी। इनके अलावा अगर किसी व्यक्ति में बहरपान सहित एक से अधिक दिव्यांगता हैं तो उन्हें भी मान्य किया है। इनके अलावा तेजाब पीड़ितों को भी वैक्सीन मिल सकता है, लेकिन उनमें श्वास प्रणाली प्रभावित हो। आनुवांशिक बीमारी मांसपेशियों का दुर्विकास से पीड़ित भी वैक्सीन ले सकते हैं।

फर्जी सर्टिफिकेट बनाया तो डॉक्टर का लाइसेंस रद्द

अगर किसी व्यक्ति को फर्जीवाड़े के तहत बीमार करार किया गया तो डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। सर्टिफिकेट पर एक डॉक्टर को अपना लाइसेंस नंबर देना होगा। ताकि भविष्य में अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई जांच मिलती है तो उसमें उक्त डॉक्टर को भी शामिल किया जा सकता है जिसने सर्टिफिकेट जारी किया हो। इसके लिए सभी राज्य और मेडिकल काउंसिल के शाखाओं को भी निर्देश दिए जा चुके हैं। ताकि डॉक्टर कोविड-19 वैक्सीनेशन को लेकर पहले से सतर्कता बरतें।

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