कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन से पड़ने वाले प्रभाव, जो था शायद असंभव

साफ हवा के चलते साफ देखी जा रही हिमालय पर्वत की धौलाधार रेंज

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के चलते भारत और कुछ अन्य देशों में भी लॉकडाउन की प्रक्रिया अपनाई गई है। भारत में लॉकडाउन को लेकर केंद्र समेत सभी राज्य सरकारें सतर्क हैं और इसका पालन सुनिश्चित कर रही हैं।

वहीँ लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में हैं और बेहद जरूरी काम के लिए ही बाहर निकल रहे हैं। लॉकडाउन के चलते इस दौरान कुछ ऐसे फायदे भी देखने को मिले हैं, जो अगर लॉकडाउन न हुआ होता तो शायद ही देखने को मिलते।

वन्यजीवों को मिला सुकून

वन्यजीवों से लेकर भौगोलिक स्तर तक लॉकडाउन के चलते काफी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। फिलहाल इंसान जहां अपने घरों में रहने को मजबूर है, ऐसे वन्यजीवों को काफी सुकून मिला है। देश के कई हिस्सों में ऐसे नज़ारे देखने को मिले हैं जहां वन्य जीव सड़कों पर निकल आए।

हाल ही में केरल की सड़कों पर एक भारतीय कस्तूरी बिलाव देखने को मिला था। यह एक बेहद दुर्लभ जीव है। सड़क पर टहलते इस जीव का वीडियो अभिनेता अर्जुन रामपाल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से शेयर किया था। इसके पहले देश के कई हिस्सों में हिरण और हाथी आदि जानवरों के भी सड़कों पर दिखाई देने की बात सामने आई है।

शहरों के विकास की गति के चलते वास्तविक जंगल बड़ी तेजी से कंक्रीट के जंगलों में बदल गए और इसका परिणाम यह हुआ कि इन वन्यजीवों को अपने लिए ठिकाना ढूँढना मुश्किल हो गया। आज जब इंसान अपने घरों में रहने को मजबूर है, तब ये जानवर अपने को आज़ाद महसूस कर रहे हैं।

हवा हुई एकदम साफ

लॉकडाउन के चलते देश भर के कारखानों को बंद करना पड़ा, जिसके परिणाम स्वरूप देश भर में वायु प्रदूषण में अचानक गिरावट देखी गई। आज देश के तमाम हिस्सों में हवा एकदम स्वच्छ हो गई गई, जो शायद पहले कभी संभव ही नहीं था।

ताजा उदाहरण जालंधर का है जहां से आज साफ हवा के चलते हिमालय पर्वत की धौलाधार रेंज साफ देखी जा रही है। कई शहरों में एक्यूआई का स्तर पहले की तुलना में 90 प्रतिशत तक सुधर गया है। इनमें पंचकुला, करनाल जैसे तमाम शहर शामिल हैं, हालांकि दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण स्तर में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।

धरती के स्वास्थ्य में सुधार

मौजूदा समय में प्रदूषण में आई भारी कमी का असर ओज़ोन परत पर भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में यह कहा गया है कि अगर स्थिति इस तरह बनी रही तो ओज़ोन परत जल्द ही पहले जैसी हो सकती है। गौरतलब है कि लॉकडाउन के पहले धरती अधिक काँपती थी, लेकिन अब उसमें कमी आई है। वैज्ञानिकों की मानें तो इससे काफी फायदा हुआ है।

ध्वनि प्रदूषण में आई कमी के कारण वैज्ञानिकों के लिए अब छोटे स्तर के भूकंपों का भी पता लगाना आसान हो गया है, जबकि इसके पहले ऐसा करने में मुश्किल आती थी। पर्यटन स्थल हुए खूबसूरत लॉकडाउन से पहले पर्यटन स्थलों पर लोगों की भीड़ हमेशा बनी रहती थी, लेकिन अब जब लोग वहाँ नहीं जा रहे हैं तो उनकी स्थिति में भी सुधर हो रहा है।

इटली के वेनिस शहर में नहर का पानी बेहद स्वच्छ हो गया है। भारत में भी मुंबई के समुद्र तट पर कुछ दिनों पहले डॉल्फ़िन देखी गई थीं। लॉकडाउन के बाद गंगा और यमुना के पानी में भी काफी सुधार देखने को मिला है। गंगा और यमुना में बड़े पैमाने पर कारखानों का दूषित पानी डाला जाता था, लेकिन अब ये दोनों ही नदियों की हालत में काफी सुधार देखने को मिला है।

प्रदूषण में लगातार कमी

कोरोना वायरस के खतरे की वजह से हुए लॉकडाउन के दौरान देश में प्रदूषण में लगातार कमी आ रही है। हवा तो साफ हो ही रही है, साथ-साथ नदियों में भी साफ पानी बह रहा है। 24 तारीख को लॉकडाउन का ऐलान होने के बाद से गंगा नदी पहले के मुकाबले 40-50 फीसदी साफ नजर आ रही है।

ईंधन की खपत

कोरोना लॉकडाउन की वजह से मार्च में भारत की ईंधन की खपत 18 प्रतिशत कम हो गई। यह एक दशक से अधिक समय में सबसे बड़ी गिरावट है। लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां और आवाजाही ठप है। गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के पेट्रोलियम उत्पाद की खपत मार्च में 17.79 प्रतिशत घटकर 16.08 मिलियन टन रह गई, क्योंकि इस दौरान डीजल, पेट्रोल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की मांग गिर गई ।

बता दें देश में सबसे अधिक खपत वाले डीजल में 24.23 प्रतिशत की मांग के साथ 5.65 मिलियन टन की कमी देखी गई। देश में डीजल की खपत में यह सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है क्योंकि अधिकांश ट्रक अब सड़क पर नहीं चल रहे और ट्रेनों के पहिए भी थमे हैं। कोविड -19 के प्रसार को रोकने के लिए लागू 21 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के रूप में पेट्रोल की बिक्री 16.37 प्रतिशत घटकर 2.15 मिलियन टन रह गई।

रसोई गैस की मांग

इस दौरान सिर्फ रसोई गैस की मांग में तेजी देखने को मिली। बीपीसीएल और एचपीसीएल ने कहा है कि उनकी लॉकडाउन के दौरान उनकी डीजल और पेट्रोल की बिक्री में 55 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। एचपीसीएल के चेयरमैन मुकेश कुमार सुराना ने पीटीआई-भाषा को बताया कि रिफाइनरी उत्पादन करीब 70 प्रतिशत तक आ गया है।

बीपीसीएल के रिफाइनरी निदेशक आर रामचंद्रन ने कहा कि रिफाइनरी क्षमता के मुकाबले 70 प्रतिशत से कम पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, ”हमारी डीजल और पेट्रोल की बिक्री 60 प्रतिशत से अधिक घट गई है और विमानन ईंधन की लगभग कोई मांग ही नहीं बची है क्योंकि सिर्फ कुछ मालवाहक विमान ही उड़ान भर रहे हैं।

इन कंपनियों को मांग में कमी के चलते इंवेन्ट्री हानि होने की आशंका है। रामचंद्रन ने कहा, ”मार्च, अप्रैल में घाटा निश्चित है और अगर लॉकडाउन आगे बढ़ा तो घाटा भी बढ़ेगा। एचपीसीएल के चेयरमैन ने लॉकडाउन आगे बढ़ाने की स्थिति में ईंधन का निर्यात करके नुकसान की भरपाई का भरोसा जताया।

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