कोरोना वायरस दवा निर्माण और इसमें भारत की भूमिका

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715

24 मार्च 2020 को एक पोस्ट के माध्यम से यह फलादेश किया गया था की 29 मार्च से 8 अप्रैल के मध्य कोरोना दवा के सामने आने और दवा निर्माण में भारत की भूमिक अहम् रहने का कहा गया था, कल 8 अप्रैल 2020 में सारा विश्व मलेरिया की दवा जिसे कोरोना दवा के लिए वैकल्पिक दवा के रूप में प्रयोग किया जा रहा है, इस दवा के लिए सभी देश भारत से मांग कर रहे है, की उन्हें यह दवा भारत भेजे,

इस फलादेश के सटीक रहने के साथ ही कई ज्योतिषी जिज्ञासुओं के यह प्रश्न आ रहे थे, की इस फलादेश का आधार किया था, आज हम इसका यहाँ ज्योतिषीय विश्लेषण कर रहे हैं-
भारत वर्ष की कुंडली वृषभ लग्न और कर्क राशि की है, इस कुंडली की यह विशेषता है की कुंडली पीड़ित और प्रभावित भाव तीसरा भाव है,जिसे पडौसी देशों के भाव के रूप में जाना जाता है. यही कारण है की भारत को सबसे अधिक परेशानियों का सामना आज तक पड़ौसियों के कारण ही करना पड़ा है, कभी चीन और पाकिस्तान अपने अपने तरीके से भारत को हानि पहुंचाने का समय समय पर प्रयास करते रहते है.

इसी श्रृंखला में आज कोरोना विश्व महामारी जो चीन की देन है, देखी जा सकती है. आज की स्थिति का फलादेश फरवरी 2019 में ही कर दिया गया था, फरवरी 2019 में जो जो कहा गया था, वही हुआ, पड़ौसी देश चीन ने एक बहुत पड़ी परेशानी भारत के साथ साथ सारे विश्व को दे दी है, जिसे सभी जूझ रहे हैं, इस समय दशा की बात करें तो भारत की कुंडली पर चंद्र महादशा में शनि अन्तर्दशा प्रभावी है. महादशानाथ चंद्र राशिश होकर तृतीय भावस्थ में पीड़ित है, पड़ौसियों ने यहाँ चंद्र को पीड़ित किया हुआ है, अन्तर्दशानाथ शनि भाग्येश और कर्मेश है, योगकारक है, वो भी पड़ौसी भाव में ग्रह युद्ध में है.

शनि की यह अन्तर्दशा जुलाई 2021 तक रहेगी, शनि का यह अन्तर दिसंबर 2019 से शुरू हुई, और इसी के साथ इस महामारी ने देश में प्रवेश भी किया। यहाँ यह बता देना सही रहेगा की इस समय राहु भारत के द्वितीय भाव और शनि-गुरु भाग्य भाव पर गोचरस्थ है. जिन्हें द्वादशेश और मारकेश मंगल का साथ मिल रहा है. द्वादशेश का द्वादश भाव को दृष्टि देना, मृत्यु भाव को बल प्रदान कर रहा है. जो 5 मई 2020 तक मृत्यु दर में वृद्धि और अशुभ स्थिति दर्शा रहा है.

अत : 04 मई 2020 तक मृत्यु का आंकड़ा बढ़ते रहने के योग बने हुए है, 13 अप्रैल 2020 को सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर, रोग प्रतिरोधक क्षमता में अवश्य वृद्धि करेंगे, परन्तु इस समय से सूर्य गोचर में भारत की कुंडली के द्वादश भाव पर रहेंगे, अत : स्थिति बहुत अनुकूल नहीं कहीं जा सकती, यहाँ सूर्य पर अष्टम भावस्थ केतु की पंचम दृष्टि भी आ रही है, इससे भी प्रतिकूलता की वृद्धि हो रही है, 4 मई 2020 के बाद जब मंगल कुम्भ राशि में गोचर करेंगे, तब स्थिति नियंत्रण में आएगी, और 30 जून 2020 को गुरु मकर राशि से धनु राशि में वक्री अवस्था में वापसी करेंगे, इस समय को राहत का समय कहा जा सकता है. तब तक एहतियात ही बचाव करेगी.

अब बात करें, कोरोना दवा की तो 28 मार्च 2020 से 1 अगस्त 2020 के मध्य शुक्र वृषभ राशि अर्थात अपनी स्वराशि में विचरण कर रहे है, यह भारत की लग्न राशि है, और शुक्र देव को संजीविनी विद्या का कारक माना गया है, शुक्र को गुरु की दृष्टि प्राप्त होने के फलस्वरूप यह फलादेश किया गया था की इस अवधि में इस महामारी से बचाव करने वाली एक दवा संजीवनी के रूप में सामने आएगी, और भारत की लग्न राशि पर लग्नेश शुक्र के होने ने यह संकेत किया की इसमें भारत की भूमिका अहम् रहेगी.
आचार्या रेखा कल्पदेव

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