कोरोना वायरस: महाराष्ट्र के वैज्ञानिक ने जांच के लिए डेवलप की खास स्टिक

पुणे: पुणे के सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सी-एमईटी) के वरिष्ठ पोलीमर वैज्ञानिक डॉ. मिलिंद कुलकर्णी ने पोलीमर स्वाब की सस्ती स्वदेशी प्रतिकृति बनायी है जिसका उपयोग कोरोना वायरस परीक्षण के लिए नमूने संग्रहण के लिए किया जा सकता है.

इस खोज को लेकर वैज्ञानिक डॉ. मिलिंद कुलकर्णी ने बताया कि पॉलिमर-आधारित किट पॉलीप्रोपाइलीन सामग्री से तैयार की गई है. इसकी मदद से स्वैब और पॉलिएस्टर फाइबर की स्टिक बनाई जा रही है. फिलहाल इस किट को क्लिनिकल ट्रायल के लिए बेंगलुरु में भेजा जाएगा.

पुणे के सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सी-एमईटी) के वरिष्ठ पॉलिमर वैज्ञानिक डॉ. मिलिंद कुलकर्णी ने शनिवार को कहा कि अगर इस उत्पादन के लिए मंजूरी मिल जाती है, तो देश को आयातित स्वैब पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी.

उन्होंने कहा, ‘हम मुख्यत: टेस्टिंग किट और पॉलिमर स्वैब इटली, जर्मनी और अमेरिका से आयात करते हैं, लेकिन आयात पाबंदियों और अंतरराष्ट्रीय लॉकडाउन के चलते हमें शीघ्र ही इन किट की कमी से जूझना पड़ सकता है.’

उन्होंने कहा कि यह सी-एमईटी, एसआरआई रिसर्च फॉर टिश्यू इंजीनियरिंग प्राइवेट, रंगडोर अस्पताल, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू और एडिटिव मैन्यूफैक्चरिंग सोसायटी ऑफ इंडिया की संयुक्त परियोजना है. प्रोटोटाइप नमूने आगे क्लीनिकल परीक्षण एवं जांच के लिए तैयार हैं.

बेंगलुरू स्थित रंगडोर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. के. एन. श्रीधर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा स्वीकृत प्रयोगशाला के साथ मिलकर इस स्वाब का परीक्षण करेंगे. वहीं यह स्वैब आयातित स्वैब की तुलना में एक तिहाई सस्ता होगा.

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