छत्तीसगढ़

भ्रष्टाचार और लालच ने डुबाया रायगढ़ शहर,टेंडर के बाद भी नहीं हुआ नालों का निर्माण

कई बस्तियों में लोगों को अपने घर तक छोड़ने पड़े।

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

भ्रष्टाचार और लालच ने डुबाया रायगढ़ शहर को टेंडर के बाद भी नहीं हुआ नालों का निर्माणशहर में 2 दिनों की बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि शहर की निचली बस्ती ही नहीं बीच बस्ती भी बारिश के पानी से तरबतर हो गया। कई बस्तियों में लोगों को अपने घर तक छोड़ने पड़े। आलम यह था कि दो दिनों की बारिश ने निगम प्रशासन की सफाई व्यवस्था और ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल कर रख दी। आधे शहर में हालात ऐसा पैदा हो गए मानो निगम नाम की कोई चीज न हों।

इन सब के पीछे लालच की प्रत्याशा साफ नजर आती है। हाल ही में आई नई शहर सरकार ने शहर के कुछ चुनिंदा डूबान क्षेत्र में आने वाले बस्तियों को बारिश से बचाने के लिए काफी पहले योजना बना ली थी। जिसमें शहर की चारों कोने में नाला निर्माण के लिए 50-50 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की। राज्य शासन ने भी इस संवेदनशील प्रस्ताव पर तुरंत सहमति देते हुए नगर निगम रायगढ़ को दो करोड़ की राशि प्रदान किया।

Corruption and greed submerged Raigad city, drains not constructed even after tender

निर्माण का श्रीगणेश अब तक नहीं हुआ

लेकिन जैसे ही नगर निगम को नाला निर्माण के लिए दो करोड़ की राशि मिली वैसे ही निगम में बैठे कुछ लोगों ने काम का ठेका हथियाने के लिए प्रत्याशा शब्द का इस्तेमाल किया। इसी प्रत्याशा के आधार पर टेंडर भी कर लिए गए और मनचाहे लोगों को काम भी दे दिए गए। इसकी जानकारी ना तो महापौर को दी गई और नहीं मेयर इन काउंसिल से स्वीकृति लेने का कोई प्रयास किया गया। यहां तक भी ठीक था लेकिन जिस प्रत्याशा को आधार बनाकर टेंडर हथियाने का काम हुआ उसके अनुरूप काम शुरू करने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
महीना बाद भी नाला निर्माण नहीं करने से आधा शहर डूबान में आ गया। यहां बता दें की बैजनाथ मोदीनगर, मरीन ड्राइव, गुजराती पारा में जल भराव को देखते हुए नाला निर्माण के लिए प्रत्याशा में टेंडर किए गए थे। जिसके निर्माण का श्रीगणेश अब तक नहीं हुआ है।

एमआईसी को निभाना होगा धर्म

शहर को बाढ़ आपदा में धकेलने वालों के विरुद्ध अब मेयर इन कौंसिल को ठोस कदम उठाना होगा। महापौर भले ही अप्रत्यक्ष प्रणाली से कुर्सी पर विराज मान हों लेकिन पूरी एमआईसी अपने वार्डवासियों के विश्वास पर यहां तक पहुचे हैं। ऐसे में जनता के विश्वास पर कायम रहने के लिए निगम को भर्राशाही मुक्त बनाना भी उनकी जिम्मेदारी है। जिस तरह से टेंडर के बाद भी नालों का निर्माण नहीं किया गया उससे सिर्फ नगर निगम ही बदनाम हुई है। इस बदनामी के दाग को अब एमआईसी को ही धोना होगा। यह धर्म एमआईसी को निभाना होगा। प्रत्याशा के टेंडर निरस्त कर एमआईसी काफी हद तक अपने दामन में लगे दाग को हटा सकती है।

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