छत्तीसगढ़

कोयले के व्यावसायिक खनन को लेकर 25 किसान संगठनों द्वारा देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

कोल इंडिया के प्राइवेटाइजेसन पर रोक लगाने की मांग

रायपुर: किसानों के 25 से ज्यादा संगठनों ने कोयले के व्यावसायिक खनन को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया. इन लोगों की मांग है कि कोल इंडिया के प्राइवेटाइजेसन पर रोक लगाया जाए. किसान नेताओं ने मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया.

किसान संगठन का कहना है कि निजीकरण में छत्तीसगढ़ के 9 कोयला खदान भी शामिल है. जिस पर विचार कर झारखंड सरकार की तरह छत्तीसगढ़ सरकार भी कोर्ट में आपत्ति दर्ज करें. किसान संगठन अध्यक्ष संजय पराते ने बताया कि किसानों के 25 से ज्यादा संगठन इस प्रदर्शन में शामिल है.

देश की सार्वजनिक संपत्ति को बेचने को लेकर केंद्र सरकार की जो नीति है, वह नीति हमारे देश को आर्थिक गुलामी की ओर ले जाएगी. इस नीति के खिलाफ देश के मजदूर किसान आदिवासी एक देश शक्ति पूर्ण संघर्ष चला रहे हैं. कोल इंडिया देश के नवरत्न कंपनियों में से एक है.

4 लाख लोगों को रोजगार देने वाली कंपनी के निजीकरण की मुहिम

पिछले साल कोल इंडिया ने 53 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा केंद्र के खजाने में जमा किया. साथ ही 17 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा मुनाफा कमाया, लेकिन 4 लाख लोगों को रोजगार देने वाली कंपनी के निजीकरण की मुहिम छेड़ी जा रही है.

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कोयला को फिर से पैदा नहीं किया जा सकता, तो इसका उपयोग देश की जनता के लिए होना चाहिए, किसी के मुनाफे के लिए नहीं. यह देश बेचने की कोशिश हो रही है. इससे जुड़ी तमाम चीजें हैं बड़े पैमाने पर आदिवासियों का विस्थापन होगा और इसका मतलब है पर्यावरण को तहस-नहस कर देना, वन्य प्राणी उनको खत्म करना, इतने बड़े संकट से लड़ने के लिए हम तैयार नहीं है.

इसलिए आज आंदोलन चलाया जा रहा है कि केंद्र सरकार अपने इस नीति को वापस लेने की घोषणा करें. एक अच्छी बात यह भी है कि हंसदेव अरण्य की चार कोयला खदानों को नीलामी से बाहर रखा गया है.

संजय पराते ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा कि झारखंड सरकार जब सुप्रीम कोर्ट में जा सकती है, तो छत्तीसगढ़ सरकार क्यों नहीं जा रही है. छत्तीसगढ़ के पूरे 9 खदानों को इस नीलामी के दायरे से बाहर रखने की मांग छत्तीसगढ़ सरकार को करना चाहिए और उसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए.

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button