दो बच्चो की मौत के मामले में कोर्ट ने की महत्वपूर्ण सुनवाई

12 साल पहले दो बच्चो की हेल्थ सेंटर में इंजेक्शन लगने के बाद मौत हो गई थी।

कोरबा: लापरवाहीपूर्वक इलाज की वजह से 12 साल पहले दो बच्चो की मौत के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला बरकरार रखते हुए कल इस मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई की.

जिसके बाद डॉ अशोक माखीजा को जेल दाखिल करा दिया गया है. यह फैसला माननीय योगेश पारिख के विशेष (जेएमएफसी) कोर्ट ने कल सुनाई है. बीते फरवरी में इनपर कोर्ट ने एक-एक हजार रूपये जुर्माना आरोपित करते हुए छह-छह माह की सजा सुनाई थी.

इस पूरे प्रकरण के दो आरोपी डॉ माखीजा और एक अन्य मनीराम लहरे जमानत पर बाहर चल रहे थे. पीड़ित पक्ष ने इनकी जमानत को चुनौती दी थी जिस पर कल बहुप्रतीक्षित फैसला आया।

उरगा थाना अंतर्गत तिलकेजा के महेश राम कुर्रे की बहू पुष्पलता कुर्रे 11 साल पहले 27 अक्टूबर 2006 को अपनी जेठानी बुधवारा बाई के साथ अपने दो बच्चे उमाशंकर (6) व गौरीशंकर (4) को लेकर खुजली का इलाज कराने तिलेकजा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गई थी.

स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अशोक मखीजा थे। पुष्पलता के दोनों बच्चों का निरीक्षण कर इंजेक्शन लगाने को मनीराम व निरंजन को दिया था. निरजंन ड्रेसर था. लेकिन मनीराम स्वस्थ्य कर्मी नहीं होने के बाद भी डॉ. मखीजा के अनुमति से वहां काम करता था.

हेल्थ सेंटर में इंजेक्शन लगने के बाद दोनों बच्चों की मौत हो गई थी। बच्चों की बड़ी मां बुधवारा बाई व मोहन भी बुखार के इलाज के लिए गए थे. हेल्थ सेंटर में उस समय इंजेक्शन लगने से उनकी स्थिति भी गंभीर हो गई थी.

उन्हें जिला अस्पताल भर्ती कराया गया था। जो इलाज के बाद स्वस्थ हो गए थे. मामले में पुलिस ने मनीराम लहरे व निरंजन के खिलाफ धारा 304 के तहत जुर्म दर्ज किया था.

मामले का चालान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के कोर्ट में पेश किया गया था. तत्कालिन मजिस्ट्रेट संध्या रात्रे ने प्रकरण की कार्रवाई के दौरान 6 अगस्त 2012 को अपने आदेश के माध्यम से डॉ. अशोक माखीजा को प्रकरण का मुख्य आरोपी मानते हुए प्रकरण में शामिल किया.

हालांकि इस बीच आरोपी निरंजन की मौत होने से उसका नाम प्रकरण से विलोपित कर दिया गया।

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