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धर्म बदल चुके हैं ये पांच धाकड़ क्रिकेटर्स, आखिरी नाम एक भारतीय का है

दुनिया के कई देशों में क्रिकेट धर्म के बराबर है। करोड़ों फैन्स इस खेल के दीवाने हैं। खिलाड़ियों में भी इस खेल के प्रति जोश साफ नजर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई एेसे खिलाड़ी भी हैं, जिन्होंने करियर के दौरान अपना धर्म बदल लिया।

आइए आपको बताते हैं उन क्रिकेटर्स के बारे में:

मोहम्मद यूसुफ: मुस्लिम देश पाकिस्तान के लिए खेलने वाले चौथे ईसाई और पांचवे गैर मुस्लिम खिलाड़ी। साल 2005 में उन्होंने इस्लाम अपनाया था। इससे पहले उनका नाम यूसुफ योहाना था, जो बाद में मोहम्मद यूसुफ हो गया था। यह भी विवाद सुनने में आया था कि उनके साथी सईद अनवर ने उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रभावित किया था।

तिलकरत्ने दिलशान: श्रीलंकाई टीम के धाकड़ खिलाड़ी रह चुके दिलशान एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुए थे। फैन्स उनके शॉट दिलस्कूप के दीवाने थे। सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने भगवान बुद्ध के दिखाए रास्ते पर चलने का फैसला किया और इस्लाम छोड़ बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला कर लिया। इससे पहले उनका नाम तुवान मोहम्मद दिलशान था, जो अब तिलकरत्ने दिलशान है।

सूरज रणदीव: श्रीलंका के इस अॉफ ब्रेक बॉलर ने देश के लिए 12 टेस्ट और 30 वनडे मैच खेले हैं। इसमें उन्होंने 86 इंटरनेशनल विकेट लिए हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में जन्म हुआ था। उनका नाम मोहम्मद मरशूक मोहम्मद सूरज था। बाद में उन्होंने साल 2010 में बौद्ध धर्म अपना लिया और उनका नाम तब से सूरज रणदीव है।

वायने पारनेल: साउथ अफ्रीका के इस तेज गेंदबाज ने जुलाई 2011 में इस्लाम अपनाने का फैसला किया था। उसी साल जनवरी में उन्होंने इसकी प्रक्रिया भी पूरी कर ली थी। उन्होंने उन सभी अटकलों को खारिज कर दिया था कि उनके साथी खिलाड़ी हाशिम आमला, इमरान ताहिर और टीम मैनेजर मोहम्मद मोसाजी का इस फैसले में कोई हाथ है। पारनेल ने कहा था कि काफी समय तक इस धर्म के बारे में पढ़ने के बाद उन्होंने फैसला लिया है। हालांकि धर्मांतरण के बाद उनका बाद वलीद है, लेकिन वह अपना पुराना नाम ही इस्तेमाल करते हैं।

एजी (अमृतसर गोविंदसिंह) कृपाल सिंह: भारत के लिए 14 टेस्ट मैच खेलने वाले सिंह एक क्रिश्चियन लड़की से शादी के बाद सिख धर्म छोड़ ईसाई बन गए थे। उन्होंने न सिर्फ पगड़ी पहननी छोड़ दी बल्कि दाढ़ी भी कटवा ली। उन्होंने भारत के लिए साल 1955 से 1964 तक क्रिकेट खेला। हालांकि यह भी कहा जाता है कि वह दोनों धर्मों को मानते थे, लेकिन उन्हें आर्नोड जॉर्ज के नाम से पुकारा जाता था।

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