बर्बादी के कगार पर फसल, कर्जमाफी की खुशी लेकिन बिजली की आंख मिचौली ने फेरा पानी

राज शार्दूल:

कोण्डागांव: जिले के किसान सूखी नदी का सीना चीरकर पानी निकालने में सफलता हासिल कर लेते हैं किंतु बिजली पर उनका बस नहीं चलता ऐसा ही कुछ इन दिनों क्षेत्र के किसान झेल रहे हैं। जिला मुख्यालय के आस-पास के गांव में भी ऐसे ही कुछ स्थिति है इसके अलावा फरसगांव बड़े राजपुर एवं केशकाल क्षेत्र में विद्युत सप्लाई की लगातार कटौती के चलते फसल खराब हो चुकी है।

जिले के ग्रामीण क्षेत्र में लगभग डेढ़ माह से विद्युत की आंख मिचौली चल रही है, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा किसानों को झेलना पड़ रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि बिजली की ऐसी परेशानी बरसो बाद देखने मिली है। कई लोग इसे सत्ता परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं। गर्मी की शुरुआत मार्च-अप्रैल से ही विद्युत की परेशानी शुरू हो चुकी थी जो कि लगातार बढ़ रही है।

कभी घंटों बिजली बंद रहती है तो कभी दिन और रात भर। विद्युत की परेशानी से आम उपभोक्ता तो हलाकान परेशान हैं ही, किसानों में इसे लेकर गहरी चिंता दिखाई दे रही है। कई किसानों के खून पसीने की कमाई विद्युत की आंख मिचौली की भेंट चढ़ गई है। बरसों बाद कर्ज माफी से किसानों के चेहरे पर खुशी दिखाई दे रही थी किंतु उस पर भी विद्युत ने पानी फेर दिया।

नहीं दिख रहा फसल बचाने का कोई रास्ता

जिले के किसान रबी के सीजन में नदी नालों एवं चेकडैम स्टॉप डेम से लेकर ट्यूबवेल जैसे श्रोतों से पानी लेकर धान, गेहूं, मक्का, सूरजमुखी आदि की फसल लेते हैं। सर्वाधिक इन दिनों मक्के की फसल ली जाती है क्योंकि इसमें पानी कम लगता है क्योंकि मक्के की पैदावार अच्छी होती है तथा इसे बेचने में भी दिक्कत नहीं होती।

जिन किसानों के पास पानी का स्रोत अधिक होता है वह धान की फसल भी लेते हैं। खरीफ की फसल की कटाई के पश्चात ही किसान रबी फसलों की तैयारी में जुट जाते हैं। यह क्रम प्रतिवर्ष चलता है। किसानों को यह अंदाजा रहता है कि नदी नालों से कितनी मात्रा में पानी की आपूर्ति की जा सकती है।

वे इसी अंदाज से फसल लगाते हैं किंतु इस बार किसानों ने पानी का इंतजाम तो कर लिया किंतु उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि ऐन वक्त पर बिजली धोखा दे देगी। वह भी इस कदर की पूरी फसल ही चौपट होने के कगार पर खड़ी हो जाए। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें पहले से हम मालूम होता कि इस वर्ष बिजली की ऐसी दुर्गति होगी तो या तो वे फसल लेते ही नहीं या कम मात्रा में फसल लगाते।

विद्युत सब स्टेशन से लगे खेतों का बुरा हाल

विद्युत विभाग की लापरवाही विश्रामपुरी में सबसे ज्यादा देखने को मिली। जहां सब स्टेशन से 300 मीटर की दूरी पर खेतों को विद्युत की आपूर्ति अनियमित होने से किसानों की गाढ़ी कमाई बर्बाद होते दिख रही है। यहां ऐसे अनेक खेत देखे जा सकते हैं जहां फसल बर्बादी के कगार पर है या पैदावार प्रभावित हो रही है।

विश्रामपुरी के विद्युत सब स्टेशन से सटे किसान सहलाल मरकाम एवं आसमन नेताम ने बताया कि उन्होंने लगभग 3 से 4 एकड़ में मक्के एवं धान की फसल लगाया है। 40 से 45 दिनों से वह विद्युत की मार झेल रहे हैं जिसके चलते उनका मक्के का फसल खराब हो चुका है। जहां अब दाने लगने की संभावना नहीं दिख रही है। जो पौधे जिंदा है वे इस कदर कमजोर हो चुके हैं कि उनमें भुट्टे नहीं लग पाएंगे।

सहलाल ने बताया कि वह आठ पैकेट मक्के का फसल लगाया था जिसमें जोताई से लेकर खाद बीज एवं लेबर का खर्च मिलाकर 50 हजार से ऊपर हो चुका है। अब उसका फसल बर्बाद होने से वह काफी चिंतित है। आसमन नेताम ने भी ऐसा ही कुछ बताया।

लाइट की कटौती

मुंडापारा विश्रामपुरी निवासी चैतई राऊत लतेल राउत ने बताया कि यहां कई किसान धान एवं मक्का की फसल लगाये हैं, उन्हें मालूम नहीं था कि इस वर्ष इस कदर लाइट की कटौती होगी और उन्होंने प्रति वर्ष की भांति फसल लगाया था जो अब बर्बाद हो रहा है।

उक्त किसानों ने उंगली के इशारे से सब स्टेशन की ओर दिखाते हुए कहा कि यहां से वह सब स्टेशन दिखाई दे रहा है जहां से लाइट की सप्लाई होती है किंतु जब बगल के खेतों का यह हाल है तो बाकी का अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्राम सलना, मारंगपुरी, कोपरा बड़ेराजपुर, गमरी, बागबेड़ा आदि के किसानों की भी लगभग यही स्थिति है।

ग्राम पलना के सरपंच देवी राम कोराम ने बताया कि लगातार वोल्टेज की समस्या के चलते यहां कई मोटर पंप जल चुके हैं जिससे फसल खराब हो रही है। वहीं जिला मुख्यालय से 7 से 8 किलोमीटर की दूरी के गांव में भी ऐसी ही स्थिति है। ग्राम सादगांव गिरोला के आसपास भी बड़ी तादाद में किसान रबी की सीजन में मक्के की फसल लेते हैं।

पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य गिरोला निवासी किसान दिलीप दीवान ने बताया कि गांव में कई किसानों की फसल बर्बाद हो रही है। लगातार लाइट गुल रहने से खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है जिसे लेकर किसानों में भारी चिंता देखी जा रही है।

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