नदी में बह गई फसल, किसानों पर मंडराया रोजी-रोटी का खतरा

दिल्ली में यमुना नदी अभी भी खतरे के निशान के करीब बह रही है. यमुना का जलस्तर बढ़ने से जमीन में कटाव भी हो रहा है. इससे उन किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जो यमुना खादर इलाके में लीज पर जमीन लेकर खेती करते हैं.

यमुना नदी के नज़दीक पिछले दो दशक से सब्जी की खेती कर रहे लक्ष्मी कुमार ने ‘आजतक’ से बातचीत करते हुए कहा ‘हमने मूली और घीया की फसल लगाई थी. इसके अलावा बाकी लोगों ने भिंडी, मिर्च, लॉकी, कद्दू और तोरी के साथ साथ कई सब्जियों की खेती की थी. लेकिन यमुना नदी का पानी बढ़ने से खेत कटकर पानी में बह गया है. इस वजह से हमारी 300 से 400 बीघा जमीन यमुना नदी में कटकर बह गई होगी.

आगे लक्ष्मी कुमार ने कहा कि जिस हिस्से में हम खड़े हैं वहां से 100 मीटर की दूरी तक खेत था. लेकिन अब नदी बह रही है. पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में यमुना किनारे खेती करने वाले लोग और उनका परिवार सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं जाता है? इस सवाल पर किसान लक्ष्मी ने कहा कि ‘जब पानी का लेवल बढ़ जाता है तो झुग्गियों से सामान पैक करके सड़क किनारे रहने चले जाते हैं. जब सरकार आती है तभी व्यवस्था मिल पाती है.

यमुना खादर में मिर्च की खेती करने वाले जोगिंदर ने कहा कि ख़तरा काफी बढ़ गया है. खेत का लगभग बड़ा हिस्सा कट चुका है और बड़ा नुकसान हुआ है. युवा किसान सचिन ने बताया कि उन्होंने लीज पर खेत लिया है. सचिन ने कहा कि खेत में लौकी और पालक की फसल लगाई थी, लेकिन पूरी फसल पानी से कटकर नदी में बह गयी है. पिछले कुछ दिनों में तेज़ी से मिट्टी कट रही है. अबतक 2 बीघा जमीन का नुकसान हो गया है. सब पानी में बह गया है. भरपाई होना मुश्किल है.

यमुना खादर में किसानी करने वाले कृष्णा ने बताया कि 8 बीघा खेत में मूली की फसल लगाई थी लेकिन 4 बीघा जमीन कटकर नदी में बह गया है और बाकी का हिस्सा भी जल्द नदी में कटकर जाएगा.

कृष्णा ने कहा कि सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है. यमुना किनारे रहने वालों की झोपड़ी कब पानी से कटकर बह जाए पता नहीं है. सरकार को किसानों की फसल के नुकसान का मुआवजा देना चाहिए. फसल में पैसा लगा चुके थे और अब आगे जीवनयापन के लिए पैसा नहीं है.

बता दें कि हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने की वजह से यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया है. पिछले दिनों दिल्ली के लोहा पुल पर यमुना नदी ख़तरे के निशान को पार कर गयी थी. हालांकि फ़िलहाल यमुना ख़तरे के निशान से नीचे बह रही है. लेकिन सोमवार को भी यमुना नदी वार्निंग लेवल से ऊपर ही बह रही थी. ऐसे में किसानों की दिक्कतों का अंत नज़दीक नज़र नहीं आ रहा है.

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