कुएं से पानी निकालने लिए किया गया साइकिलिंग विद कुआं का निर्माण

दीपक वर्मा:

अभनपुर: शासकीय कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय अभनपुर की छात्रा कुमारी कुसुम बांधे एवम सहयोगी कनुप्रिया मिरी गाइड टीचर हेमंत कुमार साहू मॉडल का नाम साइकिलिंग विद कुआं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को कुएं से पानी निकालने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए इस मॉडल का निर्माण किया गया है क्योंकि छत्तीसगढ़ के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पानी के लिए कुए पर आश्रित है अतः या मॉडल महिलाओं के लिए बहुत ही आसान एवं उपयोगी है।

: 46 वीं नेशनल , जवाहरलाल नेहरू विज्ञान,गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी 2019 जोकि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में रायपुर बी.टी. आई.ground में , NCERT , SCERT एवं शिक्षा विभाग के द्वारा आयोजित किया जा रहे है।

: मॉडल का नाम – साइक्लिंग विद वेल(कुआँ)

उद्देश्य -इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कुएं से पानी निकलते समय होने वाली कठिनाइयों एवं शारीरिक थकावट को दूर करना।

प्रस्तावना-

वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूरे देश के ग्रामीण अंचलों में आज भी पानी के लिए कुए पर आश्रित है। हमने देखा कि महिलाएं जब कुएं से पानी निकालती है खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बोर या नलकूप कम मिलते हैं। ऐसी स्थिति में पानी के लिए कुए पर आश्रित रहना एक मजबूरी होती है।

इन इलाकों में महिलाएं घर की पूरी आवश्यकताओं के लिए चाहे वह नहाने के लिए हो, कपड़े धोने के लिए हो, खाना बनाने के लिए हो, घरेलू आवश्यकताओं के लिए हो या अन्य सभी काम जिसके लिए पानी की आवश्यकता होती है वहाँ पर ही निर्भर रहते हैं।

हमने देखा कुएं से पानी निकालते समय जब महिलाएं रस्सी के माध्यम से कुएं में बाल्टी डालती हैं तो बाल्टी पानी से भरी बाल्टी ऊपर खींचने के लिए बहुत अधिक ताकत की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि 1 दिन में सुबह और शाम मिलाकर लगभग 10 से 15 बाल्टी पानी ग्रामीण महिलाओं को अपने घरेलू उपयोग के लिए आवश्यक होती है।

अतः इतना अधिक पानी कुएं से निकालने में बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करना पड़ता है। जिसके परिणाम स्वरूप महिलाओं में पीठ दर्द रीड की हड्डी में दर्द की शिकायत होने लगती है। साथ ही कई बार कुएं से पानी निकालते समय महिलाओं का कुएं में गिरने जैसी दुर्घटनाएं भी सामने आई है। इसके अलावा कुएं से पानी निकालते समय कुएं में बाल्टी गिर जाना बहुत ही आम बात है।

साधारण सा उपकरण तैयार

इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए हमने एक साधारण सा उपकरण तैयार किया है जोकि घर में पड़े पुराने साइकल के ढांचे से तैयार किया गया है। हमने पुराने साइकिल के ढांचे से जिसमें कि दोनों चक्के निकाल दिए गए हैं। उनके केवल सेंटर भाग जहां से पैदल लगा होता है और पीछे वाला भाग जिसमें चैन फिट होता है।

इस प्रकार से हमने व्यस्त इस प्रकार से व्यतीत किए हैं कि जब कोई महिला कुएं के पास सिस्टम को लगाने के बाद उस साइकिल में बैठकर धीरे-धीरे पेडल घुमाते जाएंगे। पैर के माध्यम से तो कुएं से पानी आसानी से ऊपर की ओर आने लगता है और आसानी से इस पानी को हम सीधे बाल्टी में निकाल सकते हैं इसके लिए हमें साइकिल से उतरने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

साथ ही एक बार में लगभग 3 बाल्टी के बराबर पानी आसानी से निकाला जा सकता है। ऐसे व्यक्ति जो कि दिव्यांग है। अगर उनका एक हाथ किसी कारणवश नहीं है। तो वह कुएं से पानी नहीं निकाल सकता परंतु हमारे इस उपकरण के माध्यम से वह साइकिल में बैठ कर आसानी से पानी कैसे निकाल सकता है।

हाथ से पेडल मारकर आसानी से कुएं से पानी

यदि कोई ऐसा व्यक्ति जो कि दोनों पैर से या एक पैर से दिव्यांग है। वह भी इस उपकरण के माध्यम से हाथ से पेडल मारकर आसानी से कुएं से पानी निकाल सकता है। इसके अलावा महिलाओं के लिए बहुत अच्छा है। क्योंकि इसमें सीधे सीधे महिलाओं को साइकिलिंग करने का भी मौका मिल जाएगा।

आज भी छत्तीसगढ़ के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए लोग कुएं पर ही आश्रित हैं वह के पानी को पीने के लिए घरेलू उपयोग के लिख के साथ-साथ सिंचाई के लिए भी उपयोग कर रहे हैं।

उसी स्थिति में हमारा यह जो मॉडल है यह सिंचाई के काम में भी उपयोग किया जा सकता है और पीने के पानी निकालने के लिए भी काम आ सकता है खासकर महिलाओं महिलाएं भी इस को आसानी से उपयोग कर सकते हैं।

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