अंतर्राष्ट्रीयटेक्नोलॉजीराष्ट्रीय

एस्ट्रोनॉट कल्पना चावला के नाम पर रखा है सिग्नस स्पेसक्राफ्ट का नाम

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से छोड़ा जाएगा यह अंतरिक्ष यान

नई दिल्ली: सिग्नस स्पेसक्राफ्ट का नाम एस्ट्रोनॉट कल्पना चावला के नाम पर रखा गया है. अमेरिका की एयरोस्पेस कंपनी नॉर्थरोप ग्रुमैन कॉर्पोरेशन ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से छोड़े जाने वाले सिग्नस स्पेसक्राफ्ट का नाम कल्पना चावला के नाम पर रखा.

कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला एस्ट्रोनॉट थीं. साल 2003 में अंतरिक्ष यान में हुई एक दुर्घटना में उनकी मौत हुई थी. कोलंबिया यान 16 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पर था और दुर्घटना के समय वह पृथ्वी की तरफ लौट रहा था.

करनाल में हुआ जन्म

कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। वह चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। बचपन में कल्पना को ‘मोंटू’ के नाम से बुलाया जाता था। उनकी शुरुआती पढ़ाई करनाल के टैगोर बाल निकेतन में हुई थी। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की।

सपनों को पूरा करने के लिए नासा जाना जरूरी था। इसी उद्देश्य से वह साल 1982 में अमेरिका चली गईं। उन्होंने टैक्सस यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एम.टेक किया। फिर यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।

साल 1988 में कल्पना चावला ने नासा ज्वॉइन किया। उनकी नियुक्ति नासा के रिसर्च सेंटर में हुई। इसके बाद मार्च 1995 में वह नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुईं। करीब आठ महीने के प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 19 नवंबर 1997 को अपना पहला अंतरिक्ष मिशन शुरू किया। भारत समेत पूरी दुनिया ने तालियां बजाकर और शुभकामनाएं देकर उनके दल को इस यात्रा पर रवाना किया था।

19 नवंबर 1997 को पहला अंतरिक्ष मिशन शुरू

कल्पना चावला ने 19 नवंबर 1997 को अपना पहला अंतरिक्ष मिशन शुरू किया था। तब उनकी उम्र 35 साल थी। उन्होंने 6 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ स्पेस शटल कोलंबिया STS-87 से उड़ान भरी। अपने पहले मिशन के दौरान कल्पना ने 1.04 करोड़ मील सफर तय करते हुए करीब 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताए थे।

1 फरवरी 2003 को दुर्घटना में गई जान

अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। वापसी के समय पृथ्वी के वायुमंडल में अंतरिक्ष यान के प्रवेश के समय भयंकर दुर्घटना हुई। 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया।

देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्रियों के अवशेष टेक्सास नामक शहर पर बरसने लगे और सफल कहलाया जाने वाला अभियान त्रासदी बन गया। नासा व विश्व के लिए यह एक दर्दनाक घटना थी।

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button