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असम मेडिकल कॉलेज में 8 नवजात की मौत 24 घंटे में

गुवाहाटी। बारपेटा मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे में 8 नवजात की मौत हो गई। घटना से लोगों में भय उत्पन्न हो गया है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव लुरिन ज्योति गोगोई ने असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के तुरंत इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से मामले को लेकर तुरंत कार्रवाई करने को कहा है।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि नवाजत दरअसल बीमार थे और उनकी नेचुरल मौतें हुई है।उन्होंने पांच मौतों की रिपोर्ट देते हुए दावा किया कि जिन शिशुओं की मौतें हुई है उन्हें कई बीमारियां थी। कईयों का वजन भी बहुत कम था। दो माताओं की उम्र तो 20 साल से कम है। बारपेटा मेडिकल कॉलेज में पिछले साल की तुलना में इस साल शिशु मृत्यु दर कम है। बकौल सरमा, चाइल्ड केयर पार्ट में डॉक्टरों की संख्या स्टेबल है।

दो माह पहले ही हमने सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट खोली थी और मैन पावर बढ़ाई थी। जहां तक मेरी जानकारी है बाल चिकित्सा विभाग से किसी डॉक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है।  मौतें शुद्ध रूप से क्रिटिकल नेचर ऑफ केस से संबंधित है,मसल मां की उम्र, नवजात का वजन। मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल दिलीप कुमार दत्ता ने शिशुओं की मौत को सिर्फ संयोग करार दिया है। उन्होंने कहा कि नवजात लंबे वक्त से मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे।

अस्पताल ने कोई लापरवाही नहीं बरती।नवाजत बच्चों की माताएं जन्म से पहले चैक अप के लिए नहीं गई हो,जिसके परिणाम स्वरुप वे सामान्य बच्चों के मुकाबले कमजोर पैदा हुए। उन्होंने कहा कि मृतकों में एक शिशु का वजन करीब एक किलो था जबकि अन्य का वजन 2.2 किलो से ज्यादा नहीं था। सामान्यतया एक नवजात का वजन कम से कम 2.5 किलो होना चाहिए। दत्ता ने कहा कि फिलहाल मौतों की असल वजह का पता लगाने के लिए जांच चल रही है।

आपको बता दें कि इससे पहले बारपेटा मेडिकल कॉलेज में माधब चौधरी कॉलेज की होनहार स्टूडेंट सोमाली सरकार की मौत को लेकर काफी हंगामा हुआ था। डॉक्टरों के कथित गलत इलाज की वजह से सरकार की मौत हुई थी। सूत्रों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज के गलत इलाज की वजह से सोनाली सरकार की मौत कोई पहली घटना नहीं है।

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