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Birthday special: दामोदर मोदी के PM बनने का सफर

नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कौन नहीं जानता। आज देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इस नाम की जय-जयकार हो रही है। देश में राजनीति के धनी मोदी एक ऐसे पीएम हैं जिनके सामने सारी मुसीबतें कमजोर पड़ जाती हैं। वह एक अच्छे वक्ता के साथ-साथ कई गुणों के धनी हैं वह बिना किसी सहायता के लंबे समय तक भाषण देने की क्षमता रखते हैं।

पीएम मोदी ने अपने जीवन की शरुआत अपने भाई के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचकर की थी। एक चाय बेचने वाले कभी देश का पीएम बनेगा ये किसी ने सोचा नहीं था लेकिन मोदी आने वाली कई सदियों के लिए एक मिसाल हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि आखिर एक चाय बेचने वाला देश का पीएम कैसे बन गया। आइए नजर डालते हैं मोदी के बचपन से लेकर पीएम बनने तक के सफर पर-

1958 में ली थी बाल स्वयंसेवक की शपथ
नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को वडऩगर में दामोदार दास मूलचंद मोदी और हीराबेन के यहां हुआ। वह वडऩगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे। 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी।

1980 में भाजपा ईकाई में हुए शामिल
नरेंद्र मोदी ने राजनीति शास्त्र में एमए किया। वे 1967 में 17 साल की उम्र में अहमदाबाद पहुंचे। इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए। इस तरह सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे। वह 1980 के दशक में गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए। वे वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए। नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की।

2001 में मोदी को सौंपी गुजरात की कमान
मुरली मनोहर जोशी की कश्मीर के लालचौक पर तिरंगा फहराने की यात्रा में भी मोदी हर वक्त साथ रहे। इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए। मोदी को 1995 में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया। इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया। इस पद पर वो अक्‍टूबर 2001 तक रहे। लेकिन 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई। उस समय गुजरात में भूकंप आया था और भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।

2013 में संभाली देश की कमान
नरेंद्र मोदी आरएसएस के बहुत मेहनती कार्यकर्ता थे और आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में वो अपने मैनेजमेंट का कमाल भी दिखाते थे। 2007 के विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के विकास को मुद्दा बनाया और फिर जीतकर लौटे फिर 2012 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा गुजरात विधानसभा चुनावों में विजयी रही। राज्य में तीसरी बार अपनी सत्ता का डंका बजाया। 2012 तक मोदी का भाजपा में कद इतना बड़ा हो गया कि उन्हें पार्टी के पीएम उम्मीदवार के रूप में देखा जाने लगा था। 2013 में उन्हें भाजपा प्रचार अभियान का प्रमुख बनाया गया और बाद में भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम का एलान कर दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार का गठन किया।

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