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बेटियों के लिए दो बच्चों की मां ने थामी बस का स्टीयरिंग

कोलकाता. मुसाफिरों को आवाज लगाते कंडक्टर, एक के बाद एक यात्रियों को भरती बस, उसमें लटकते लोग कोलकाता में चलने वाली मिनी बसों में ऐसा नजारा रोज ही दिखता है. मगर इस शहर में कोलकाता में चलने वाली एक मिनी बस खास है.

निमटा-हावड़ा रुट पर चलने वाली इस मिनी बस की ड्राइवर दो बच्चों की मां प्रतिमा पोद्दार है. ये इस शहर की इकलौती महिला ड्राइवर हैं, जो मिनी बस चलाती हैं. इससे भी बड़ी बात ये है कि पिछले 6 सालों से प्रतिमा बस चला रही हैं और इस दौरान उनकी मिनी बस से कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ.

महिला बस ड्राइवर प्रतिमा की कहानी-

आमतौर पर महिलाओं के लिए समाज में कई बंधन होते हैं. मगर 42 साल की प्रतिमा ने तमाम बंदिशें तोड़कर ये काम चुना और इसमें उनकी मदद की पति शिबेश्वर ने. वो पेशे से बस कंडक्टर हैं. प्रतिमा ने ये सब शौक से किया, ऐसा नहीं है. 2011 में पति शिबेश्वर, जो पहले मिनी बस चलाते थे एक दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए. स्थिति ऐसी हो गई कि वो बिस्तर से चल फिर नहीं सकते थे.

ऐसे में पति की तीमारदारी से लेकर घर की सारी जिम्मेदारी प्रतिमा के कंधों पर आ गई. हालात से हारने के बजाए प्रतिमा ने नौकरी ढूंढना शुरू किया. मगर उन्हें नौकरी नहीं मिली. इसके बाद भी प्रतिमा ने हिम्मत नहीं हारी. बचपन में गाड़ी चलाने का ऐसा शौक लगा था कि बड़े होते-होते अपने जुनून के बूते गाड़ी चलाना सीख ली.

पति की तीमारदारी के साथ पत्नी ने सीखा बस चलाना-

मुश्किल वक्त में वही जुनून प्रतिमा के काम आया. कुछ दिन तक प्रतिमा ने एंबुलेंस और टैक्सी चलाई. पति शिबेश्वर के ठीक होने के बाद प्रतिमा ने उनसे बस चलाना सीखना शुरू किया. कुछ दिनों के भीतर ही उन्हें अच्छे से बस चलाना आ गया. इसके बाद प्रतिमा ने बड़ी गाड़ियों को चलाने के लिए लायसेंस लिया और फिर शुरू हुआ निमटा से हावड़ा का सफर.

पिछले कुछ सालों से प्रतिमा रोजाना मिनी बस चलाने का ये काम कर रही हैं. तमाम मुश्किलों के बाद भी प्रतिमा ने हार नहीं मानी और पति के साथ मिलकर बस की ईएमआई चुकाने के साथ ही बेटियों को अच्छी शिक्षा दे रही हैं. उनकी बेटियां भी बड़ी होनहार हैं. बड़ी बेटी राखी, जहां बंगाल में जिमनास्टिक में अपना मकाम बना रही हैं. वो जादवपुर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही है. वहीं छोटी बेटी अभी स्कूल में पढ़ रही है.

खुद पुलिस वाले भी मानते हैं कि प्रतिमा बेहतर ड्राइवर हैं. कभी भी यातायात नियमों को नहीं तोड़ती हैं. यही वजह है कि इतने सालों में उनकी बस से कोई दुर्घटना नहीं हुई है.

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