उत्तर प्रदेशराज्य

पुलिस मुठभेड़ के दौरान हुई दयाशंकर की गिरफ्तारी, विकास दुबे के हैं साथी

गिरफ्तारी के बाद दयाशंकर से पुलिस को कई राज पता चल गए

कानपुर: हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के साथी और इस घटना में शामिल बताए जा रहे दयाशंकर अग्नीहोत्री उर्फ कल्लू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मुठभेड़ के दौरान दयाशंकर की गिरफ्तारी हुई है। दयाशंकर के पैर में गोली भी लगी है।

गिरफ्तारी के बाद दयाशंकर से पुलिस को कई राज पता चल गए हैं। उसने पुलिस को कई अहम जानकारियां दी हैं। कल्लू ने पुलिस को बताया कि दबिश की सूचना पुलिस ने ही विकास दुबे को दी थी। सूचना के बाद विकास दुबे ने तैयारियां तेज कर दी थी। इसके बाद विकास ने हथियार अपने पास मंगा लिए।

कई लोगों को भी बुला लिया था। असलाधारियों को इकट्ठा कर हमला किया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दयाशंंकर को कल्याणपुर पुलिस से जवाहरपुरम में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। दयाशंकर पर पुलिस ने इस घटना के बाद 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।

कुख्यात विकास आदतन शातिर किस्म का

कुख्यात विकास आदतन शातिर किस्म का है। अपराध की दुनिया में उसके काम करने के तरीके नक्सलियों से मिलते हैं। नक्सलियों की तरह ही वह फोन के इस्तेमाल में यकीन नहीं करता है। आमने-सामने या अपने लोगों के माध्यम से अपनी बात कहता है। इस कारण सर्विलांस सिस्टम पर आश्रित पुलिस को उसे ट्रेस करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

विकास दुबे के एक करीबी के मुताबिक वह जब भी बिकरू आता था, उसके लोग पहले से ही कोठी पर तैनात हो जाते थे। गांव, आसपास के गांव या फिर शहर में किसी को धमकी देनी होती या कोई आपराधिक डील करनी होती थी तो वह अपने लोगों के जरिए संबंधित इंसान तक संदेश पहुंच देता था।

कभी मोबाइल का प्रयोग करना भी पड़ता था तो सिम का इस्तेमाल कर तोड़कर फेंक देता था। हैंडसेट के साथ ही उसका सिम भी बदल दिया जाता था। सालों से वह इसी तरह काम कर रहा था, जिससे मोबाइल की आदत लगभग छूट गई थी।

पुलिस उसके मिलने वाले 100 लोगों के नम्बर पर होने वाली बातचीत लगातार सुन रही है। 2200 नम्बर सर्विलांस पर हैं। बीते 48 घंटों में फोन पर विकास दुबे ने किसी से सम्पर्क नहीं किया है। मुखबिर तंत्र कमजोर होने के कारण फील्ड से भी सूचनाएं कम ही मिल पा रही हैं।

विकास दुबे को दबोचने के लिए पूरी रेंज में ऐसे अफसरों को छांटा गया है जिनका क्रिमिनल नेटवर्क बहुत मजबूत है। वे आज भी मोबाइल सर्विलांस से ज्यादा अपने मुखबिर तंत्र पर काम करते हैं। ऐसे तीन दर्जन से अधिक अफसरों को विकास की तलाश में लगाया गया है। कानपुर से लेकर इटावा तक उसकी तलाश की जा रही है।

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