LG हाउस में सीएम केजरीवाल के धरने के मामले में डेडलॉक खत्‍म

मामले की सुनवाई रेगुलर बेंच में होगी

दिल्ली के एलजी हाउस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों द्वारा धरना मामले में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अब दोनों पक्षों के बीच डेड लॉक टूट चुका है, इसलिए मामले की सुनवाई रेगुलर बेंच में होगी. अब कोर्ट ने तीन अगस्त की तारीख मुकर्रर की है. कोर्ट ने कहा कि हड़ताल की संवैधानिकता को लेकर उठे कानूनी सवालों पर सुनवाई होगी.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों द्वारा राजनिवास में हड़ताल करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हालांकि अब ये हड़ताल खत्म हो चुकी है. सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की हड़ताल पर सवाल उठाया था और कहा कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि ये क्या है धरना या हड़ताल. इस धरने या हड़ताल के लिए किसने अनुमति दी या उन्होंने खुद ही ये फैसला लिया?

हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि धरने या हड़ताल का फैसला उनका व्यक्तिगत था या कैबिनेट का सामूहिक निर्णय. वहां बैठना क्या मान्य है? वो किसके ऑफिस में बैठे हैं? क्या वो हड़ताल के लिए बाहर बैठे हैं? ट्रेड यूनियन अपनी मांग को लेकर बाहर हड़ताल करती हैं, क्या ये वैसे हड़ताल है? क्या एलजी हाउस में बैठने के लिए एलजी की अनुमति है?

हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी के घर या आफिस में धरने पर नहीं बैठा जा सकता. हाईकोर्ट ने IAS एसोसिएशन को भी पार्टी बनाया. बीजेपी के विजेंद्र गुप्ता, प्रवेश वर्मा, सिरसा, कपिल मिश्रा ने भी याचिका दाखिल की है. हाईकोर्ट ने इस याचिका को टैग किया है.

एक जनहित याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री या मंत्री किसी भी तरह हडताल नहीं कर सकते क्योंकि वो संवैधानिक पद पर होते हैं. कानून निर्माता हड़ताल नहीं कर सकते. इसलिए इस हड़ताल को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिया जाए. याचिका में कहा गया है कि कोर्ट मुख्यमंत्री को अपनी जिम्मेदारी निभाने का आदेश दे क्योंकि उनकी हडताल की वजह से दिल्ली का सारा कामकाज ठप हो गया है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें मांग की गई है कि कोर्ट दिल्ली के उपराज्यपाल को निर्देश दे कि वो दिल्ली सरकार के IAS अफसरों को हडताल खत्म करने के आदेश दे. याचिका में कहा गया है कि सरकारी अफसर इस तरह हडताल नहीं कर सकते. ये पूरे समाज को जबरन फिरौती को लिए हथियार नहीं बनाया जा सकता.

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