सावन शिव का प्रिय महीना इसलिए पूजा करने से पहले अपनाए ये नियम

-साधना काल के नियम

सावन का महत्व हिन्दू धर्म हैं सावन के महीने को शिब जी का प्रिय मन जाता हैं इसलिए शिब भक्त इस महीने को बड़े धूम धाम के साथ मानते हैं और पूरी श्रद्दधा भक्ति के साथ पूजा पाठ कर शिव को प्रसन्न करते हैं हिंदू धर्म में सावन के माह को भगवान शंकर का प्रिय महीना माना जाता है। इस महीने में भोलेनाथ के भक्त पूरी श्रद्धा से उनका जाप करते हैं।

मान्यता है कि इस महीने में शिव शंभू के चमत्कारी मंत्रों का जाप से हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है। लेकिन इनका जाप करने से पहले व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन करना ज़रूरी है। यदि साधना काल के दौरान इन मंत्रों का जाप न किया जाए तो कभी-कभी व्यक्ति को बहुत बड़े खतरनाक परिणामों का सामना करना पड़ता है।

मंत्रों का प्रभाव मंदिर में प्रतिष्ठित प्रतिमा के प्रभाव का आधार मंत्र ही तो है क्योंकि बिना मंत्र सिद्धि यंत्र हो या प्रतिमा अपना प्रभाव नहीं देती। मंत्र व्यक्ति की वाणी, काया, विचार को प्रभावपूर्ण बनाते हैं। इसलिए सही मंत्र उच्चारण ही सर्वशक्तिदायक बनाता है। सनातन धर्म के अनुसार मंत्र सिद्धि के लिए यह ज़रूरी है कि मंत्र को गुप्त रखा जाए। इसका मतलब है कि मंत्र- साधक के बारे में यह बात किसी को पता नहीं होनी चाहिए कि वो किस मंत्र का जप करता है या कर रहा है।

यदि मंत्र के समय कोई पास में हो तो हमेशा मानसिक जप करना चाहिए। मंत्र उच्चारण की छोटी से गलती भी मानव के सारे करे-कराए पर पानी फेर सकती है। इसलिए गुरु के द्वारा दिए गए हिदायतों का पालन साधक को अवश्य करना चाहिए।

साधना काल के नियम-

मंत्र-साधना के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति धारण करें।

उपवास में दूध-फल आदि का सात्विक भोजन लिया जाए।

श्रृंगार-प्रसाधन और कर्म व विलासिता का त्याग अतिआवश्यक है।

साधना काल में भूमि शयन ही करना चाहिए।

साधना काल में वाणी का असंतुलन, कटु-भाषण, प्रलाप, मिथ्या वचन आदि का त्याग करें।

साधना-स्थल के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ साधना का स्थान, सामाजिक और पारिवारिक संपर्क से अलग होना जरूरी है।

निरंतर मंत्र जप अथवा इष्‍ट देवता का स्मरण-चिंतन करना जरूरी होता है।

जिसकी साधना की जा रही हो, उसके प्रति मन में पूर्ण आस्था रखें।

मौन रहने की कोशिश करें।

मंत्र साधना में किसी भी साधक को चाहिए कि ये प्रयोज्य वस्तुएं-
जैसे- आसन, माला, वस्त्र, हवन सामग्री।


शिव के प्रिय सरलतम मंत्र-

‘ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ।’ जीवन में कठिन समस्या आने पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का 1 लाख बार जप करें।

शिव पंचाक्षरी मंत्र- ‘ॐ नम: शिवाय’। प्रतिदिन एक माला (108 बार) का जप।

महामृत्युंजय मंत्र- ‘ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ’। प्रतिदिन 108 बार का जप करें।

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