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Death Anniversary- एक दिन हमको याद करोगे… के साथ गीता दत्त ने कह दिया अलविदा

याद करोगे याद करोगे एक दिन हमको याद करोगे… पुण्यतिथि/ गीता दत्त बीते दौर की सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका गीता दत्त, एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने श्वेत-श्याम पटल पर अपने सुरीले स्वर से सभी को कायल किया। उनकी गायिकी में जहाँ एक तरफ चंचलता और उन्माद था तो दूसरी तरफ दर्द भी था।

23 नवम्बर 1930 को फरीदपुर, बांग्लादेश में पैदा हुई गीता का पूरा नाम ‘गीता घोष राय चौधरी’ था। जब वे 12 साल की तभी उनका परिवार मुम्बई आ बसा। बचपन से ही संगीत में रूचि रखने वाली गीता को संगीत की शिक्षा ‘हनुमान प्रसाद’ से मिली। फिल्मों में पहला मौका 16 साल की उम्र में ही ‘भक्त प्रह्लाद’ फिल्म से मिली।

इसी साल 1946 में ही उन्होंने अन्य तीन फिल्मे ‘कश्मीर की कली, रसीली, सर्कस किंग’ में भी गीत गाये लेकिन ये सभी फ़िल्में असफल रही। इसी दौरान इनकी भेंट सचिनदेव बर्मन से हुई और उन्होंने अगले साल 1947 में ‘दो भाई’ फिल्म में उन्हें गाने का अवसर दिया।

‘दो भाई’ फिल्म के दो गीत ‘मेरा सुन्दर सपना बीत गया और याद करोगे याद करोगे एक दिन हमको याद करोगे’ श्रोताओं को बहुत पसंद आया। और इस तरह गीता दत्त बॉलीवुड में स्थापित हुई। 1951 में ‘बाज़ी’ फिल्म के गीत ‘तदबीर से बिगड़ी हुई तस्वीर बना ले’ के रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी भेंट गुरुदत्त से हुई।

और उसी समय दिल के आर-पार लगा तीर-ए-नज़र और आगे चलकर 1953 में गुरुदत्त से इनकी शादी हुई। ये लो मैं हारी पिया गाने वाली गीता दत्त को बड़े धोखें है इस प्यार में तब पता चला जब उनके रिश्ते के बीच वहीदा रहमान आ गयी।

और फिर वक़्त ने किया ऐसा सितम की गीता दत्त कहती रही कि ना जाओ सैयां छुड़ा के बैयाँ कसम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी लेकिन गुरुदत्त वहीदा के तरफ खींचे चले गये। और वो समय भी आया जब जोगी मत जा, मत जा गाने वाली गीता के गुरु दत्त दुनिया छोड़ दिये। गुरुदत्त की मृत्यु से गीता टूट गयी और गीता दत्त के स्वास्थ पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

41 साल की अल्पायु में छोड़ दी थी दुनिया

‘कैसे कोई जिये जहर है जिंदगी’ गाने वाली यह गायिका मात्र 41 साल की अल्पायु में 20 जुलाई 1972 को यह दुनिया छोड़ दी। गीता दत्त के गीतों से सजी फिल्मों में ‘दो भाई, प्यासा, सुजाता, साहिब बीबी और ग़ुलाम, बाज़ी, बांवरे नैन, शर्त, मिस्टर एंड मिसेज 55, बादबान, आर-पार, सीआईडी, हाबड़ा ब्रिज़, कागज़ के फूल’ शामिल है।

गुरुदत्त की फिल्मों के लिये उन्होंने बेहतरीन गीत गाये। और सचिनदेव और हेंमत कुमार ने इनसे बेहतरीन गीत गवायें। इसके अलावा उन्होंने कई बांग्ला फिल्मों के लिये भी यादगार गीत गाये उनमें ‘हरनो सुर, पृथ्वी आमार छाया, इंद्राणी, हॉस्पिटल, स्वरशिल्पी’ आदि फ़िल्में शामिल है।

पुण्यतिथि पर सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका को उनके एक गीत के साथ श्रद्धांजलि…! ‘वक्त ने किया क्या हसीं सितम तुम रहे ना तुम, हम रहे ना हम बेकरार दिल इस तरह मिले जिस तरह कभी हम जुदा न थे तुम भी खो गये, हम भी खो गये एक राह पर चल के दो कदम जायेंगे कहाँ सूझता नहीं चल पड़े मगर रास्ता नहीं क्या तलाश है कुछ पता नहीं बुन रहे हैं दिन ख्वाब दम-ब-दम’

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