गर्भस्थ शवक की भी मौत, पोस्टमार्टम बाद वन विभाग ने किया दाहसंस्कार

- मनराखन ठाकुर

पिथौरा: बारनवापारा अभ्यारण्य अन्तर्गत के जंगल में एक गर्भवती सांभर से केवल एक की मौत नही हुई थी। बल्कि इसके पेट में गर्भस्थ शवक की भी मौत हो जाने से कुल दो सांभर के रूप में वन्य जीवों का पोस्टमार्टम बाद वन विभाग ने दाहसंस्कार किया था। कोठारी परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 169 में उसी जगह इन सांभरों ने दम तोड़े हैं जहां वर्तमान में उस वन भैसा प्रजनन केंद्र को उसकी पुरानी जगह नुन्छा नामक स्थान से उजाड़ कर यहां कोरजोन 169में इस जंगल के हृदय स्थल कहे जाने वाले खैरछापर नाम के पुराने तालाब के चारों तरफ से चैनल तारों से एक बडे़ क्षेत्र की घेराबंदी कर पुनः निर्माण किया गया है। यह वही खैरछापर है जहां सांभर के रूप में इन जंगली जीवों के मृत्यु के कुछ दिन पहले ही सीसीएफ वन्यप्राणी केके बिसेन ने अपने निरीक्षण दौरा कार्यक्रम के तहत स्थानांतरित कर बनाये गए इस बडे़ बाडे़ को वन भैसा रेस्क्यू सेन्टर बनाया जाना बताया था।जिसकी विचरणशील जंगली हाथियों से सुरक्षा के लिए हाथी विकर्षण फैंसिंग तार लगे होने की बात अधिकारी ने कही थी।

जिसमें लगे हाथी विकर्षण फैंसिंग की मापदंड के बारे में बताते हुए अन्य कोई भी एनीमल्स को किसी प्रकार कोई दिक्कत तथा कोई भी नुकसान नही होना बताया गया था।लेकिन अधिकारी के निरीक्षण के कुछ दिन बाद ही पीछा करते कुत्तों से अपनी जान बचाने इस चैनल तारों से घिरे तालाब की ओर भागते आये इस गर्भवती मादा सांभर की संभवतः कही इसलिए जान तो नही चली गई हो जो शायद इस पुराने खैरछापर तालाब के चैनल तारों से नही घिरे होने से इस तालाब के पानी भीतर जाकर अपने साथ ही गर्भस्थ शवक को बचा लेती।क्योंकि सांभर का स्वभाव बताया जाता है कि जब कभी भी कोई हिंसक शिकारी पशु शिकार के लिए इनका पीछा करते हैं तो अक्सर यह वन्य जीव किसी भी जलस्रोत के पानी अंदर अपनी जान की रक्षा के लिए चला जाता है।यही नही चीतल सहित अन्य कई शाकाहारी वन्यप्राणी भी पीछे पडे़ हिंसकों से बचने जलस्रोतों या गांवों की तरफ़ ही भागते अक्सर देखें जाते हैं।

अधिकारी भी इन बातों को भलीभाँति समझते ही हैं।फिर भी ऐसी घटनाएं सामने आती रही है।चाहे शिकारी कुत्ते नोचकर मार खायें हो या फिर किसी शिकारी के चंगुल में फंस कर ऐसे बेजुबां वन्यप्राणी के प्राण गए हो।हाल में कोठारी परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक169खैरछापर के साथ ही देवपुर परिक्षेत्र अन्तर्गत देवरूंग के पास शिकारियों के विद्युत प्रवाहित तार के चपेट में आने से मृत हुए दो बायसनों की मौतें इनका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।हालांकि बायसनों के मामले में पकडे़ गए आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने में वन विभाग के अधिकारियों ने कामयाबी पाई हो।लेकिन कोठारी परिक्षेत्र में सांभरों के मौत के लिए किसे सजा मिले। क्योंकि पीछे पडे़ कुत्तों से बचने के लिए गर्भवती मादा सांभर खैरछापर तालाब के लिए भागी जरूर थी।

लेकिन तालाब के बडे़ हिस्से चैनल तारों से घिरे होने से न तो तालाब के भीतर जा सकी न ही घेराव से आगे बढ़ सकी और कुत्तों के हमले का शिकार बन बैठी। जिसे खैरछापर में काम करते मजदूरों ने कुत्तों को इससे दूर भगाकर इसकी रक्षा की परंतु करीब एक घंटे बाद इसकी मौत हो गई।इस मृत हुए गर्भवती मादा सांभर के बारे में जब हमने कोठारी परिक्षेत्र के परिक्षेत्र अधिकारी टी.एस.ध्रुव से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि यह सांभर कंतरा बैरियर की ओर से करीब चार-पांच किमी.दौड़ कर खैरछापर की तरफ से आयी है।इसके पीछे पांच-सात के लगभग शिकारी कुत्ते लगे होने की बात कहते हुए उन्होंने ने खैरछापर कक्ष क्रमांक169में काम कर रहे है मजदूरों व अमलें ने कुत्तों को इससे दूर भगाया जिससे इसकी रक्षा हुई।

लेकिन करीब एक घंटे बाद इसकी मौत होना बताया।उन्होंने यह भी कहाकि इसके शरीर में कुत्तों से जख्म कम हुआ था।किन्तु लंबे दौड़ से सांस व शाँक लगने से भी इसकी मौत एक घंटे के बाद हो सकने की बात कही।पीछे लगे कुत्तों को शिकारी बताते कहाकि सुनसान समय में शिकारी शिकार के ताक में होते हैं। हलांकि उन्होंने ने शिकारियों पर नियंत्रण नहीं होने की बात को टालते हुए कहा कि वन अमलें सुबह करीब सात-आठ बजे से डेढ़ बजे तक तथा तकरीबन तीन बजे से शाम तक गश्त करते हैं।जबकि सांभरों की यह मौत लगभग 16 जुलाई के साढे़ बजे दिन में होना बताया गया तथा पोस्टमार्टम करीब दो ढाई बजे कर जलाने की जानकारी उन्होंने दी।कोरजोन खैरछापर169के चैनलिंग घेरा तारों के मापदंड बताते हुए कहा कि इसकी ऊचाई करीब सात फीट है।स्थानांतरण पूर्व नुन्छा में वन भैसा प्रजनन केंद्र में करीब आठ फीट ऊंची थी।इन तारों से सांभर घायल नही हो सकता बल्कि कुत्तों से जख्मी होने की बात कही।

इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि कोरजोन खैरछापर में पुराने तालाब इन तारों से करीब10हेक्टेयर क्षेत्रफल पूर्ववत के नुन्छा के पास बने वन भैसा केंद्र के आकार में ही चैनल तारों से ही घेर कर वन भैसा प्रजनन केंद्र का निर्माण बताया। जिसे रेस्कयू सेंटर नही कह सकते क्योंकि रेस्क्यू सेंटर में बीमार व घायल हुए वन्य जीवों के उपचार केंद्र होता है।जबकि कुछ दिन पूर्व पीसीसीएफ ने 169 खैरछापर में इसे वन भैसा रेस्क्यू सेन्टर बताया था।इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आज 19 जुलाई को भी एक करीब दो साल के सांभर ने भी कोठारी वन परिक्षेत्र मुख्यालय के पास के तालाब में जाकर पीछे पडे़ कुत्तों से अपनी जान बचाई है।इस घटना के पहले खैरछापर कक्ष क्रमांक169में कुत्तों की वजह से जख्मी हो कर मरी गर्भवती सांभर के कोख में करीब दो माह शवक का भी मौत होना बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि इस घटना के दिन16जुलाई को अपने कर्तव्य पालन में बाहर रहे हैं। जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि शिकारी अक्सर जुलाई-अगस्त में संक्रिय हो रहते हैं।

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