राष्ट्रीय

तूतीकोरिन में हुआ जानमाल का नुकसान, 13 की मौत

102 घायल, 19 की हालत गंभीर, डीएम-एसपी हटाए गए

चेन्नई। तूतीकोरिन में भड़के जनाक्रोश में काफी जान एवं माल का नुकसान हुआ है। साउथ रेंज के आईजी शैलेष कुमार ने बताया कि अभी तक इस मामले में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 11 पुरुष एवं 2 महिलाएं शामिल हैं। घायलों की संख्या 102 है। इनमें से 19 गंभीर रूप से घायल हैं। जिन वाहनों में आग लगाई गई उससे भी काफी नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा 1 करोड़ 27 लाख रुपए का है।

तूतीकोरिन में स्टरलाइट प्लांट के खिलाफ भड़की हिंसा गुरुवार को भी नजर आई और भीड़ ने बसों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान फायरिंग में एक और शख्स की मौत हो गई जिसके बाद हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा 12 पर पहुंच गया। हिंसा को देखते हुए प्रशासन ने शहर में गुरुवार रात से ही इंटरनेट पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। इस बीच खबर है कि डीएम और एसपी भी बदल दिए गए हैं।

डीएमके नेता स्टालिन धरने पर बैठे : वहीं शहर में हुई हिंसा के खिलाफ डीएमके नेता स्टालिन धरने पर बैठ गए जिन्हें कुछ ही देर बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया। धरने से पहले स्टालिन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 12 लोगों की मौत के बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाके का दौरा करके पीड़ितों से मिलना तक जरूरी नहीं समझा। हम मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री तत्काल इस्तीफा दें।

बिजली सप्लाई भी काटी, राज्य सरकार 30 तक मांगा जवाबी हलफनामा : दूसरी तरफ तमिलनाडु प्रदूषण विभाग ने तुतुकुड़ी के कलेक्टर को निर्देश जारी कर कहा है कि वो तत्काल स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर की बिजली सप्लाय बंद कर दें।

इस बीच मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि तूतीकोरिन में मारे गए लोगों के शव अगले आदेश तक सुरक्षित रखे जाएं। जस्टिस टी रविंद्रन व पी वेलमुरगन की अवकाश बेंच ने कहा कि राज्य सरकार 30 मई तक जवाबी हलफनामा दायर करे। तीन अधिवक्ताओं की तरफ से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया। तीनों को आदेश दिया गया कि पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता देने के लिए वह नियमों के तहत काम करें।

चार मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम : याचिका में मांग की गई थी कि मृतकों का पोस्टमार्टम निजी चिकित्सकों से कराने के लिए सरकार को आदेश दिया जाए। इसमें पीड़ितों को मुआवजा, दोषी अफसरों पर कार्रवाई, सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा करने के साथ मामले की न्यायिक जांच की मांग भी की गई। याचिका में कहा गया कि पुलिस की कार्रवाई सुनियोजित थी। सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त एडवोकेट जनरल नर्मदा संपथ ने कहा कि सरकार लोगों के साथ है। चार मजिस्ट्रेट पोस्टमार्टम की निगरानी कर रहे हैं। जांच के लिए सरकार ने एक सदस्यीय आयोग का गठन तत्काल प्रभाव से कर दिया है।

इंटरनेट बंद, सुरक्षा बढ़ी : गुरुवार को फिर भड़की हिंसा को देखते हुए सरकार ने इंटरनेट सेवाएं गुरवार रात 9 बजे से अगले आदेश तक के लिए बंद कर दी हैं। वहीं शहर में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है वहीं धारा 144 लागू है।

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