केबिनेट में फैसला : टाटा स्टील प्लांट के लिए ली गई जमीन किसानों को वापस होगी

रायपुर।

भूपेश बघेल सरकार के मंत्रिमंडल के गठन के बाद हुई केबिनेट की पहली बैठक में बस्तर जिले के नवीगुड़ा में टाटा के स्टील प्लांट के लिए लोहांडीगुड़ा और तोकापाल तहसील में 10 गांव के किसानों से अधिग्रहित जमीन उन्हें वापस लौटाने का निर्णय लिया गया. राज्य सरकार के इस सैद्धांतिक फैसले को अमल में लाने के लिए मुख्य सचिव अब कार्ययोजना बनाएंगे।

भूपेश बघेल मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्री रविंद्र चौबे और मोहम्मद अकबर ने पत्रकारों को बैठक में लिए निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि जमीन अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 101 के तहत जमीन अधिग्रहण के पांच साल के बाद भी उद्योग स्थापित नहीं कर पाने की स्थिति में जमीन वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

उद्योग के लिए सीएसआईडीसी के द्वारा 2043 हेक्टेयर जमीन ली गई थी, जिसमें शासकीय छोटे-बड़े झाड़ के जंगल के अलावा 10 गांव के 1707 किसानों की 1784.61 हेक्टेयर जमीन शामिल थी. जमीन अधिग्रहण के बाद कुछ किसानों को मुआवजा के तौर पर 42.7 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है।

2005 में टाटा स्टील के साथ हुआ था एमओयू

पत्रकार वार्ता में मंत्री द्वय रविंद्र चौबे और मो. अकबर ने बताया कि बस्तर जिले के लोहांडीगुड़ा तहसील में 5.5 मिलियन पर एनम क्षमता वाले स्टील प्लांट के लिए 4 जून 2005 को राज्य सरकार और टाटा स्टील के बीच एमओयू हुआ था. प्लांट के लिए सीएसआईडीसी की ओर से फरवरी 2008 और दिसम्बर 2008 में जमीन अधिग्रहित की गई थी. लेकिन टाटा ने 3 फरवरी 2016 को प्लांट लगाने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर दी थी. जिसके बाद अब राज्य सरकार ने अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस लेने का निर्णय लिया गया है.

गांव जहां के किसानों की जमीन ली गई थी

टाटा के स्टील प्लांट के लिए जिन गांवों में भूमि अधिग्रहण किया गया था, उनमें लोहांडीगुड़ा तहसील के अंतर्गत ग्राम छिंदगांव, ग्राम कुम्हली, छिंदगांव, बेलियापाल, बडांजी, दाबपाल, बड़ेपरोदा, बेलर और सिरिसगुड़ा में तथा तहसील तोकापाल के अंतर्गत ग्राम टाकरागुड़ा शामिल हैं. इस पर संबंधित कम्पनी ने अब कोई उद्योग स्थापित नहीं किया है।

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