छत्तीसगढ़ संस्कृत संगोष्ठी में फैसला, संस्कृत को बनाया जाए अनिवार्य विषय

पदाधिकारियों का भी हुआ एलान

बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ संस्कृत संगोष्ठी का आयोजन बिलासपुर में किया गया। संगोष्ठी में व्यापक चर्चा के बाद मुख्य संरक्षक और मार्गदर्शक की अनुमति से कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। इस दौरान विचार विमर्श के फैसला लिया गया कि संस्कृत में छिपे भारतीय संस्कृति के रहस्य और ज्ञान विज्ञान को उजागर करने के लिए हरसंभव समेकित प्रयास किया जाएगा।

बिलासपुर में छत्तीसगढ़ संस्कृत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान जिम्मेदार लोगों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ संस्कृत और ज्ञान विज्ञान को लेकर व्यापक चर्चा हुई। परंपराओं और संस्कृत में छिपे ज्ञान विज्ञान को सबके सामने लाने का फैसला किया गया। क्रियान्वयन को लेकर भी विचार मंथन किया गया।

संगोष्ठी में लोगों के गहन विचार विमर्ष के बाद सदस्यों ने संरक्षक मंडल के साथ ही पदाधिकारियों के नाम का एलान किया गया। छत्तीसगढ़ संस्कृत संगठन का मुख्य संरक्षक राजे श्री राम सुंदर दास, महंत दूधाधारी मठ रायपुर, स्वामी परमात्मानंद संस्कृत विद्या मण्डलं के पूर्वाध्यक्ष, आशुतोष चतुर्वेदी डिप्टी कलेक्टर बिलासपुर, नन्दकुमार चौबे डिप्टी कलेक्टर को बनाया गया।

इस दौरान संगठन के प्रबुद्धजनों ने पदाधिकारियों के नाम की भी घोषणा की। छत्तीसगढ़ संस्कृत संगठन का अध्यक्ष आचार्य नवीन कृष्ण रेणु को बनाया गया। आचार्य मनीष शर्मा को सचिव पद की जिम्मेदारी दी गयी। संगठन सचिव के पद आचार्य मुकेश चौबे के नाम का एलान किया गया।
संगोष्ठी में उपस्थित लोगों ने समवेत स्वर में फैसला किया कि सभी संस्कृत विद्यालयों में शास्त्रीय परम्परागत अध्यापकों की नियुक्ति हो।

संस्कृत विद्या मण्डलं के सभी आधुनिक विषयो को संस्कृत भाषा मे भाषांतरण किया जाये। प्राचीन संस्कृत विद्यालयों को महाविद्यालय के रूप में मान्यता दी जाए। राज्य में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए। विद्यालयों में वैकल्पिक भाषा संस्कृत को पूरी तरह से अनिवार्य किया जाए।

सदस्यों ने कहा कि संस्कृत विद्यामण्डलं को संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान प्रोजेक्ट के माध्यम से ऑडियो वीडियो तैयार कर बच्चों के लिए ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाए।

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