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टूलकिट मामले में आरोपी जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की जमानत पर आज आयेगा फैसला

लिस ने पांच दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी लेकिन अदालत ने उसके आग्रह को नामंजूर कर दिया

नई दिल्ली:टूलकिट मामले में आरोपी जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को दिल्ली की एक अदालत ने फिर एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। हालांकि, पुलिस ने पांच दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी लेकिन अदालत ने उसके आग्रह को नामंजूर कर दिया।

वहीं, दिशा की जमानत पर मंगलवार को फैसला आना है। तीन दिन की न्यायिक हिरासत खत्म होने पर दिशा रवि को पटियाला हाउस स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा के समक्ष पेश किया गया।

जांच अधिकारी ने अदालत से दिशा का पांच दिन की पुलिस रिमांड स्वीकार करने का आग्रह करते हुए कहा कि इस मामले में सह-आरोपी निकिता जैकब व शांतनु मुलुक सोमवार को ही जांच में शामिल हुए हैं।

उन्होंने कहा, दिशा पहले भी स्वयं को निर्दोष बताते हुए सह-आरोपियों पर आरोप लगाती रही है। ऐसे में दोनों अन्य आरोपियों से पूछताछ की जांच रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज के संबंध में दिशा से पूछताछ करनी है। इसके अलावा जरूरत हुई तो सभी आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर भी पूछताछ की जाएगी। ऐसे में जांच हित में पांच दिन का रिमांड स्वीकार किया जाए।

वहीं, दिशा की ओर से पेश अधिवक्ता ने रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि जांच एजेंसी पहले ही उनके मुवक्किल से पांच दिन का रिमांड लेकर पूछताछ कर चुकी है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि जब निकिता और शांतनु हिरासत में नहीं हैं तो मेरे मुवक्किल का रिमांड क्यों मांगा जा रहा है। उससे न्यायिक हिरासत में भी उन दोनों के बयानों के संदर्भ में पूछताछ हो सकती है।

अभियोजन ने इसका विरोध करते हुए कहा पुलिस हिरासत को सजा के रूप में क्यों देखा जा रहा है। यह किसी भी जांच एजेंसी का अधिकार है।उन्होंने कहा, अदालत को उनकी मुवक्किल की जमानत पर मंगलवार को फैसला देना है और पुलिस जानबूझ कर रिमांड लेकर फैसले को टलवाना चाहती है।

ऐसे में रिमांड के आवेदन को खारिज किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दिशा को एक दिन के रिमांड पर भेजते हुए कहा कि सह-आरोपियों से पूछताछ के आधार पर दिशा से एक दिन में ही पूछताछ संभव है।

किसान आंदोलन को फैलाने में निभाई थी अहम भूमिका दिशा को बंगलूरू से 13 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद उन्हें दिल्ली लाया गया था और पुलिस ने पांच दिन का रिमांड लिया था।

दिशा पर आरोप है कि उन्होंने किसान आंदोलन को वैश्विक रूप में फैलाने के लिए बने एक गूगल टूलकिट में कई बार एडिटिंग की और फिर जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेजा। पुलिस के अनुसार इस टूलकिट के माध्यम से किसान आंदोलन के समर्थन में ट्विटर स्टॉर्म लाए जाने की बात थी।

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