फ़िरोज़ाबाद के दीपक ने बॉलीबुड में जमाई अपने जुनून की धाक

फिल्मों के लिए लिखे गीत और 5 फिल्मों में दिया संगीत निर्देशन

-शैलेन्द्र गुप्ता शैली-

फ़िरोज़ाबाद : चूड़ियों और कांच आयटम के लिए प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद शहर के अट्ठाइस साल के होनहार युवक दीपक अग्रवाल मुम्बई में एक कामयाब गीतकार और म्यूजिक डायरेक्टर हैं।दीपक ने अनेक फिल्मों के लिये उम्दा गीत लिखें हैं और गानों को कम्पोज किए हैं।गीत लिखने के लिये दीपक को पहला ब्रेक वर्ष 2013 में फ़िल्म ‘जिंदगी फिफ्टी फिफ्टी’ से मिला।इस फ़िल्म के लिये गीत लिखे, जिसे गाया बप्पी लहरी और गुल्फी ने और संगीत दिया है विवेक कर ने।

संगीत और गीत के जुनून के बल पर फ़िल्म के लिए विख्यात और चुनोतियों से भरे शहर मुम्बई में सम्मानजनक जगह पाकर कामयाबी हासिल करने वाले दीपक ने ‘क्लिपर’ से वार्ता करते हुए कहा है कि बॉलीबुड में संघर्ष असीमित हैं,लेकिन माता पिता के आशीर्वाद और अग्रजों के स्नेह की ताकत से संघर्ष के पहाड़ काटने में सफलता मिलती गई।फ़िरोज़ाबाद में 4 नवंबर 1989 को जन्मे, पले और पढ़े दीपक एक मध्यम श्रेणी परिवार से हैं।इनकी माताजी पुष्पा निहायत सादगी जीवन जीते हुए ब्रह्माकुमारी ज्ञान से जुड़ीं हुईं हैं। पराजय में छिपी हुई ‘सीख’ को तराशने में तल्लीन दीपक ने एक दशक से भी कम समय में पांच फिल्मों में संगीत निर्देशन किया है और 9 फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं।दिल का शुकुन शीर्षक से 2013 में गीतों का एलबम भी रिलीज़ हुआ है।

शहर फ़िरोज़ाबाद को भी फ़ख्र है कि गीत और संगीत की पारिवारिक बैक ग्राउंड के बिना भी दीपक ने यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि जुनून को अगर सार्थक दिशा दी जाए तो असंभव भी संभव होता है।अपने जुनून को परवान चढ़ाने दीपक वर्ष 2009 में फ़िरोज़ाबाद से मुम्बई गए ।दीपक की अपकमिंग फिल्मों के नाम हैं-डार्कलाइफ(2019),लव इन टैक्सी(2018)और सीक्रेट ऑफ सेल्फी(2018)।

गीत लिखने के शौक के सवाल के उत्तर में गजब के आत्मविश्वास से लबरेज दीपक ने ‘क्लिपर’ से कहा कि दुकान चलाने वाले उनके पिता अशोक अग्रवाल को मुशायरा और कवि सम्मेलनों को सुनने का शौक होने के कारण उनके संग मैं भी जाता था,पिताजी के शौक के कारण क्लास आठवीं में अध्ययन के दौरान ही गीत लिखने लगा था।मन ने तय कर लिया था कि फिल्मों के लिए गीत लिखूंगा, लक्ष्य तय कर लिया था।

दीपक ने कहा कि कुछ महान लेखकों और संगीत निर्देशकों से प्रेरणा ली।उन्होंने लोक और शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने कहा कि एक दशक से भी कम समय में बॉलीवुड के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में जगह बना पाया। शुरुआती सालों में उन्होंने अपने संगीत यात्रा को गीतकार के रूप में शुरू करने से पहले संगीत निर्देशकों और गीतकारों के साथ अपना अधिकांश समय बिताया है। दीपक कहते हैं कि निर्देशक कुणाल वी सिंह एक नए संगीतकार की तलाश में थे।मुझे उन्होंने अपनी फिल्म “खेल तो अब शरु होगा” में मौका दिया और दीपक ने फिल्म के शीर्षक गीत की रचना की। 2017 में रिलीज हुई फ़िल्म ‘जीना इसी का नाम है’ के लिए भी गीत लिखे।उन्होंने बताया कि एक दिन निर्देशक केसव पनर्जी का फोन आया कि वे मुझसे मिलना चाहते हैं।इस कॉल ने मेरी खुशियों को पर लगा दिए।मुझसे फ़िल्म के लिये गीत लिखने को कहा।फिल्म निर्देशक जिनके लिए उन्होंने संगीत के लिए काम किया ,उनमें कुणाल वी सिंह, केशव पनर्जी, अजित वर्मा, अक्षय आनंद जैसे नाम शामिल हैं।

दीपक द्वारा गीत लिखने और गीतों के कंपोज़िंग से जुड़ी फिल्मों के नाम इस प्रकार हैं-“ओउप्स ए देसी” (2013), “हम बडे आशिक मिजाज” (2016), “खेल तो अब शुरू होगा (2016), “एक कहानी जूली की” (2016), “जीना इसी का नाम है'(2017),रकधर(2017)तीशानगी ‘(2018)आदि हैं।

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