दीपावली महालक्ष्मी पूजन विधि

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

भारतीय संस्कृति में अनेक पर्व व त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। यह पर्व असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।इस दिन भगवान राम चौदह वर्ष वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, कृष्ण भक्तों के अनुसार दुष्ट राजा नरकासुर का वध कृष्ण ने इसी दिन किया था।

दीपावली खुशियों का त्यौहार है। इस दिन हिंदू परिवारों में भगवान गणेश व लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन गणेश जी की पूजा से ऋद्धि-सिद्धि की व लक्ष्मी जी के पूजन से धन, वैभव, सुख, सम्पतियों की प्राप्ति होती है। दीपावली को काल रात्रि भी कहा जाता है क्योंकि तंत्र-मंत्र मंत्रों की सिद्धि के लिए यह रात्रि अत्यधिक उपयोगी मानी जातीहै।

दीपावली संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है ‘‘दीपको की पंक्ति। प्रत्येक व्यापारी दुकान या घर पर लक्ष्मी पूजन करता है,वही दूसरी ओर गृहस्थ साया प्रदोष काल में महालक्ष्मी का आवाहन करते हैं।इसका अभिप्राय यह है कि जहां गृहस्थ और व्यापारी ने धन की देवी लक्ष्मी सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, वहीं तांत्रिक कुछ विशेष सिद्धियां अर्जित करते हैं।

पूजन सामग्री-महालक्ष्मी पूजन में केसर रोली,चावल,पान,सुपारी फल,फूल,दूध,खील,बताशे,सिंदूर,में,शहद, मिठाइयां,दही,गंगाजल, धूप,अगरबत्तियां,दीपक,रुई,कलावा, नारियल और तांबे का कलश।

पूजन विधि-भूमि को शुद्ध करके नवग्रह यंत्र बनाएं। इसके साथ ही तांबे के कलश में गंगाजल,दूध,दही, शहद,सुपारी,सिक्का और लौंग आदि डालकर उसे लाल कपड़े से ढककर एक कच्चा नारियल कलावे से बांध कर रख दें। जहां नवग्रह यंत्र बनाया है।

तत्पश्चात् पवित्र आसन पर बैठकर स्वस्ति वाचन करें। गणेश जी स्मरणकर अप नेदाहिनेहाथ में गंध,अक्षता,पुष्प,दूर्वा,द्रव्य और जल आदिलेकरगणेश,महालक्ष्मी , कुबेर आदि देवी-देवताओं के पूजन का संकल्प करें। सर्व प्रथम गणेश और लक्ष्मी का पूजन करें और फिर षोडशमातृका पूजन व नवग्रह पूजन के महालक्ष्मी आदि देवी-देवताओं का पूजन करें।

दीपक पूजा:दीपक ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। इसे भगवान का तेजस्वी रूप मानकर उसकी पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय अंतःकरण में सद्ज्ञान का प्रकाशउत्पन्न हो रहा है ऐसी भावना रखनी चाहिए।

दीपावली दिन पारिवारिक परंपरा के अनुसार ग्यारह, इक्कीस अथवा इससे अधिक तिल तेल दीपक प्रज्वलित करके थाली में रखकर पूजा करें। इसके बाद महिलाएं अपने हाथ से संपूर्ण सुहाग सामग्री लक्ष्मी को अर्पित करें। अगले दिन स्नान के बाद पूजा करके उस सामग्री को मां लक्ष्मी का प्रसाद मानकर स्वयं प्रयोग करें, इससे महालक्ष्मी कृपा सदा बनी रहती है। कार्यक्षेत्र में सफलता व आर्थिक स्थिति में उन्नति के लिए सिंह लग्न अथवा स्थिर लग्न में श्रीसूक्त पाठ करें। उस समय आसन पर

बैठकर लक्ष्मी जी की तस्वीर के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं व श्री सूक्त का पाठ करें। इसके बाद हवनकुंड में श्रीसूक्त की प्रत्येक ऋचा के साथ आहुति दें। दीपावली पूजन के समय गणेश-लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की स्थापना अनिवार्य है।

लक्ष्मीजी दाहिनी और विष्णु जी और बाईंओर गणेशजी को रखना चाहिए। समुद्र से उत्पन्न दक्षिणावर्ती शंख, मोती, शंख, गोमती चक्र आदि लक्ष्मी के सहोदर भाई हैं।

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