राष्ट्रीय

दिल्ली सरकार को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने किया परिपत्र को रद्द

पायलट परियोजना को चुनौती देने वाली एक एनजीओ की याचिका पर फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली :

दिल्‍ली सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्लीवासियों को अन्य लोगों के मुकाबले तरजीह देने संबंधी गुरु तेगबहादुर अस्पताल में इलाज के लिए आप सरकार के परिपत्र को शुक्रवार को रद्द कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ ने दिल्ली की आम आदमी सरकार की इस पायलट परियोजना को चुनौती देने वाली एक एनजीओ की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अदालत इसपर विचार कर रही थी कि अन्य लोगों के मुकाबले जीटीबी में इलाज के लिए दिल्लीवासियों को तरजीह देने की आप सरकार की योजना संविधान प्रदत समानता और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करती है या नहीं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार का आदेश मनमाना और तर्कहीन है। दिल्ली देश की राजधानी है और देश के किसी भी मरीज को यहां के अस्पतालों में इलाज के लिए मना नहीं किया जा सकता।

यह सर्कुलर समानता के अधिकार और जीने के हक के खिलाफ है। इसीलिए हम इसे रद्द कर रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता के इस तर्क को माना कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले ज्यादातर मरीज गरीब होते हैं और सरकारी अस्पताल इनके लिए आख़िरी विकल्प होते हैं।

हाईकोर्ट का यह आदेश दिल्ली सरकार को तुरंत प्रभाव से लागू करना होगा, यानी अब जीटीबी अस्पताल से दिल्ली सरकार को तुरंत उन होर्डिंग्स को हटाना होगा, जिनमें बाहर से आने वाले लोगों के इलाज की मनाही संबंधी बात लिखी है।

अगर अस्पताल का प्रशासन इस आदेश के बाद दिल्ली के बाहर से आए किसी भी मरीज को इलाज से मना करता है तो यह कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी।

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