दिल्ली को सिर्फ 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की थी जरूरत, मांगे 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन : रिपोर्ट

दिल्ली की इसी मांग के कारण करीब 12 राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हुई थी

नई दिल्ली:अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई एक ऑक्सीजन ऑडिट टीम की शुरुआती रिपोर्ट अब सामने आई है. रिपोर्ट में दिल्ली सरकार द्वारा तब किए गए ऑक्सीजन संकट के दावे को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, जब दिल्ली सरकार द्वारा 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग का शोर मचाया जा रहा था. तब दिल्ली को सिर्फ 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी.

दिल्ली की वजह से कई राज्यों को हुई परेशानी –

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली की इसी मांग के कारण करीब 12 राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हुई थी, क्योंकि तब की जा रही मांग के मुताबिक ऑक्सीजन की अतिरिक्त सप्लाई दिल्ली में की जा रही थी.

ऑक्सीजन टास्क फोर्स के मुताबिक, 29 अप्रैल से 10 मई के बीच कुछ अस्पतालों में डाटा ठीक किया गया. दिल्ली सरकार ने इस दौरान 1140 MT ऑक्सीजन की ज़रूरत बताई थी, जबकि करेक्शन के बाद ये डाटा 209 एमटी पहुंचा.

टास्क फोर्स की ओर से सुझाव दिया गया है कि देश में ऑक्सीजन निर्माण के लिए एक नीति होनी चाहिए, बड़े शहरों के आसपास ही निर्माण की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि पचास फीसदी तक सप्लाई यहां से ही हो सके. इसके लिए दिल्ली-मुंबई को प्राथमिकता दी जा सकती है.

ऑडिट पैनल की रिपोर्ट के बाद बयानबाजी तेज –

ऑडिट पैनल की इस रिपोर्ट के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर लिखा कि ऑक्सीजन की मांग जितनी थी उससे 4 गुना ज्यादा की और बाकि प्रदेशों को उसका नुकसान उठाना पड़ा, उनको कमी पड़ी. शोर मचाना कोई दिल्ली सरकार से सीखे.

दिल्ली बीजेपी के नेता विजेंद्र गुप्ता ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली सरकार ने डिमांड से चार गुना मांग रखी, फिर भी केंद्र की ओर से उसे ऑक्सीजन की सप्लाई मिली. लेकिन अस्पतालों को मदद नहीं की गई, दिल्ली के लोगों को ब्लैक मार्केट में ऑक्सीजन खरीदना पड़ा था.

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