किशोर आत्महत्या मामले में दिल्ली शीर्ष पर

बच्चों की इन बेवजह मौतों ने सरकारी सिस्टम को भी हिला कर रख दिया है।

नई दिल्ली : किशोर आत्महत्या मामले में दिल्ली शीर्ष पर है . देश में सबसे ज्यादा दिल्ली के बच्चे और किशोर आत्महत्या कर रहे हैं। भले ही इन घटनाओं के पीछे कारण अलग-अलग हों, लेकिन बच्चों की इन बेवजह मौतों ने सरकारी सिस्टम को भी हिला कर रख दिया है।

यूं तो आत्महत्या के मामले में चेन्नई और बंगलूरू क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर हैं। लेकिन अगर 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की बात करें तो दिल्ली शीर्ष पर है। हाल ही में सामने आई नेशनल फैमिली प्रोफाइल 2018 की रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है। इसके अनुसार, दिल्ली में 14 वर्ष से कम और 14 से 18 वर्ष के बीच आयु के बच्चे और किशोर-किशोरियां मानसिक तौर पर कमजोर हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सालाना करीब सवा लाख से ज्यादा लोग विभिन्न कारणों के चलते आत्महत्या कर रहे हैं। वर्ष 2015 में भारत में 1.33 लाख लोगों ने आत्महत्या की है। रिपोर्ट में 53 शहरों की सूची भी जारी हुई है, जिसमें सर्वाधिक आत्महत्या चेन्नई में 2274 दर्ज की हैं।

जबकि इसके बाद दूसरे नंबर पर बंगलूरू है, जहां 1855 लोगों ने मौत को गले लगाया। इसके बाद तीसरे नंबर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली है। यहां 1553 आत्महत्याएं दर्ज हुईं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इस रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली में 14 वर्ष तक की आयु की 15 बेटियां और 21 बेटों ने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का निर्णय लिया, जबकि 14 से 18 वर्ष के बीच 65 लड़के और 54 लड़कियों ने आत्महत्या की।

ये आंकड़े पूरे देश के सभी मेट्रो व महानगर में सर्वाधिक हैं। जबकि वयस्कों की बात करें तो 18 से 30 वर्ष के बीच आत्महत्या करने वाली महिलाएं 281 और पुरुष 425 हैं। चौंकाने वाली है स्थिति, सतर्कता की जरूरत क्लीनिकल रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयोजक डॉ. विकास ढिकव बताते हैं कि अभी तक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं था, लेकिन केंद्र सरकार की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है।

स्कूल और कॉलेज जाने वाली उम्र के बच्चे आत्महत्या के लिए कदम उठा रहे हैं। इसके पीछे पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ तो मुख्य वजह है ही। साथ ही अन्य कई कारण ऐसी स्थिति में काम करते हैं। अगर परिवार चाहे तो सतर्कता रख अपने बच्चों को बचा सकते हैं। उन्हें फिजूल के तनाव से दूर रख सकता है।

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