इस प्रकरण की बारीकी से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग

मिथ्या एवं बेबुनियाद आरोप बाबत पत्र

रायपुर:मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने आपको एक ज्ञापन सौंपकर मेरे ऊपर भ्रष्टाचार एवं अनियमितता के मिथ्या एवं बेबुनियाद आरोप लगाये हैं। शुक्ला के इन आरोपों से पूर्णतः असहमत होते हुए भी किसी भी जांच के लिए तैयार हूं लेकिन आपको जिस ढंग से ज्ञापन सौंपकर मीडिया में प्रचारित-प्रसारित किया गया और मुझे अपमानित करने का प्रयास किया गया, उससे मैं बेहद आहत हूं।

मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह वही आरोप हैं जो मुझ पर कई बार षड्यंत्रपूर्वक लगाया जा चुके हैं और हर बार जांच में गलत पाये गये हैं। इसके बाद प्रकरण नस्तीबद्ध किये गये हैं। इन्हीं बेबुनियाद आरोपों को अब आपके संगठन (कांग्रेस) के प्रमुख प्रवक्ता शुक्ला के माध्यम से आपको ज्ञापन के रूप में सौंपा गया है।

अतः मेरा विनम्र आग्रह है कि प्रकरण की बारीकी से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने का कष्ट करें। मैंने हमेशा व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर, बिना राजनीतिक भेदभाव के दुग्ध महासंघ के हित में कार्य किया है। मैंने कभी ऐसा काम नहीं किया है, जिससे दुग्ध महासंघ को नुकसान हो।

महोदय, दुग्ध महासंघ और इन आरोपों के संबंध में कुछ तथ्य आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं और आपको अवगत कराना चाहता हूं कि ये बेबुनियाद आरोप मुझ पर क्यों लगाये जा रहे हैं? इन आरोपों के पीछे शासकीय डेयरी विभाग के वे अधिकारी हैं, जो वर्षों से करोड़ों की तनख्वाह लेकर काम एक कौड़ी का नहीं करते थे।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि शासकीय डेयरी विभाग में लगभग 170 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी थे, जिसमें मिल्क कमिश्नर, डिप्टी मिल्क कमिश्नर से लेकर ड्राइवर और चपरासी भी शामिल हैं, जो करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रतिवर्ष वेतन लेते थे, लेकिन 30 वर्षों में दूध का उत्पादन 03-04 हजार लीटर प्रतिदिन से कभी अधिक नहीं कर पाये। मैंने इस सफेद हाथी रूपी

शासकीय डेयरी विभाग को डाइंग के कैडर घोषित करवाकर छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ का गठन करवाया। इसी से रुष्ट होकर इसके 02-03 अधिकारी दुग्ध महासंघ को बदनाम करने का षडयंत्र करने लगे। इसमें से एक अधिकारी के तो लगातार दुग्ध महासंघ का एमडी बनने के लिए प्रयासरत रहने की चर्चा थी। उसके कार्य व आचरण को देखते हुए उसका प्रयोजन सिद्ध नहीं हो सका।

अमूमन ऐसी स्थिति दुग्ध महासंघ में भी थी जहां काफी बड़े वेतन पर दर्जनों अधिकारी कर्मचारी बिना काम के वेतन पा रहे थे। यहां कई अधिकारियों की तनख्वाह आई.ए.एस से अधिक थी। यहां टैंकर ड्राइवर भी 65-70 हजार रुपये का वेतन पा रहे हैं।

सहकारिता पर आधारित दुग्ध महासंघ की अर्थव्यवस्था रसातल में जा चुकी थी, जिसे उबारने का मैंने हर स्तर पर प्रयास किया। चूंकि दुग्ध महासंघ अध्यक्ष पद पर मेरे आने से पूर्व ये सब यहां काम कम राजनीति अधिक करते थे। इन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं से सांठगांठ कर ली थी और इसके बलबूते पर वे बिना काम के वेतन पा रहे थे।

इस पर जब अंकुश लगाने का प्रयास किया गया तो उन्होंने तत्कालीन मंत्रियों एवं राजनीतिज्ञों से दुग्ध महासंघ के प्रबंधन पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिश की। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अपने आपको सहकार भारती और आरएसएस का पदाधिकारी बताने वाला यह कर्मचारी अपनी पोस्टिंग के लिए आपके एक-दो मं़ि़त्रयों से बाकायदा नोटशीट लेकर आया है।

इसी तरह कई विध्वंसकारी, जिनके स्वार्थों की पूर्ति नहीं की जा सकी, उनमें सहकार भारती का एक तथा कथित नेता, जिन्हें वहां से निष्काषित कर दिया गया है और जिसकी अनुचित मांगों को महासंघ ने कभी नहीं माना, इसी तरह महासंघ के कर्मचारी नेता जो कांग्रेस व आपका संरक्षण होने का दावा करते हैं, प्रेस क्लब के एक कर्मचारी जिसकी अनुचित मांग को नहीं माना गया, दुग्ध महासंघ के बिलासपुर में पदस्थ एक कर्मी जिसे गबन के आरोप में दंडित किया गया, इन सब लोगों ने मिलकर मीडिया को गलत जानकारी देकर व तथ्यों को तोड़-मरोड़कर दुग्ध महासंघ में भ्रष्टाचार होने की बात प्रचारित की है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने भ्रष्टाचार के जो आरोप दोहराये हैं, इसकी शासन स्तर पर कई बार जांच की चुकी है और हर बार आरोप बेबुनियाद पाये गये हैं। जिस डिप्टी मिल्क कमिश्नर के.के. तिवारी की जांच रिपोर्ट का हवाला देकर श्री शुक्ला ने जांच की मांग की है, वह शिकायत भी बिलासपुर में पदस्थ एक डिप्टी मिल्क कमिश्नर के इशारे पर दुग्ध महासंघ के सस्पेंडेड कर्मचारी से करायी गई थी।

दिलचस्प है कि इस मामले में जांच अधिकारी के.के. तिवारी ने आरोपी अधिकारी एवं महासंघ के अभिलेख का परीक्षण किये बिना केवल शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर एक फर्जी जांच प्रतिवेदन तैयार किया और इसे विभाग को सौंपने से पूर्व मीडिया में प्रचारित कर दिया।

राज्य शासन ने तिवारी के इस कृत्य को गंभीरता से लिया और उनके इस आचरण को दोषपूर्ण एवं एकपक्षीय मानते हुए उनको शो काज नोटिस दी। इतना ही नहीं, उन्हें निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी लेकिन उनके रिटायरमेंट के कारण तत्कालीन कृषि मंत्री ने कार्रवाई रोक दी। यह सारा प्रकरण शासकीय दस्तावेजों में आज भी उपलब्ध है।

इसी तरह इन्हीं आरोपों को लेकर एक पूर्व संचालक के माध्यम से शिकायत करायी गई थी जो 24-06-2016 को नस्तीबद्ध की गई है। सहकार भारती के कथित नेता ने शुक्ला के ज्ञापन में उल्लेखित आरोपों के अतिरिक्त 24 बिन्दुओं पर शिकायत की थी, वह भी नस्तीबद्ध कर दी गई हैं।

इसी तरह इस सहकार भारती के कथित नेता द्वारा मेरी पूर्व की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, वह भी विफल रही थी। वर्तमान में इन षड्यंत्रकारियों ने मिलकर मेरे वर्तमान निर्वाचन को चुनौती दी है जिस पर न्यायालय में सुनवाई जारी है। आश्चर्यजनक है कि पंजीयक द्वारा भी स्वविवेक से धारा 61ए के तहत दुग्ध महासंघ के 05 वर्षों के कार्यकाल की जांच करायी जा रही है।

महोदय, मैंने दुग्ध महासंघ में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम किया है। 1985 में बना दुग्ध संघ का यह प्लांट जिसकी क्षमता प्रतिदिन 65 हजार लीटर दूध प्रोसेसिंग की थी, वहां तक 27-28 वर्षों में कभी नहीं पहुंचा था। वर्ष 2013 में जब मैं यहां अध्यक्ष के रूप में मनोनीत हुआ तब यह सिर्फ 25-30 हजार लीटर प्रतिदिन प्रोसेसिंग करके दूध की मार्केटिंग करता था।

इस दूध का काफी बड़ा हिस्सा पड़ोसी राज्यों से खरीदकर लाया जाता था। पूरे देश में छत्तीसगढ़ को अल्प दूध वाले राज्य के नाम से जाना जाता था। लेकिन मैंने किसानों के बीच लगातार काम कर उन्हें दुग्ध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया और अपने कार्यकाल के दूसरे-तीसरे वर्षों में दुग्ध महासंघ के प्लांट की क्षमता को प्राप्त कर लिया।

इतना ही नहीं, जो महासंघ 25-30 वर्षों से घाटे में था, उसे दुग्ध उत्पादक किसानों के सहयोग एवं अथक प्रयासों के जरिये लाभ की स्थिति में लाकर .02 साल तक किसानों को बोनस बांटा है। हमारे इन प्रयासों से किसान प्रोत्साहित होकर लगातार दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने लगे हैं।

तीन-चार वर्षों में ही छत्तीसगढ़ में दूध का उत्पादन प्रतिदिन 02-2.50 लाख लीटर तक पहुंच गया है जिसमें दुग्ध महासंघ स्वयं प्रतिदिन 1.3 लाख लीटर दूध एकत्र करता रहा है जो हमारी क्षमता का दोगुना तक रहा।

इसके अतिरिक्त हमारे प्रयासों का ही परिणाम है कि अमूल जो महाराष्ट्र से दूध संग्रह करता था उसे राज्य के किसानों के हित में छत्तीसगढ़ से दूध कलेक्शन के लिए मजबूर किया। हमारे इन प्रयासों से ही प्राइवेट डेयरियांें गांवों मेें दूध कलेक्शन का काम शुरू कर सकीं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ इन दिनों किसानों को दूध की सबसे अधिक कीमत देने वाला राज्य है।

महोदय, छत्तीसगढ़ में दूध की खपत काफी कम है। यहां ज्यादातर लोग दूध का उपयोग चाय में ही करते हैं जिसके कारण राज्य में दूध का उत्पादन अधिक और मांग कम है। दुग्ध महासंघ को अपने उत्पादित दूध को खपाने में काफी दिक्कत आने लगी। मजबूरी में किसानों से एकत्र किया गया दूध, पाउडर बनाने के लिए मध्यप्रदेश भेजना पड़ा क्यांेकि उस वक्त छत्तीसगढ़ या उसके आसपास दूध पाउडर निर्माण का कोई प्लांट नहीं था। दुर्भाग्य से इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूध पाउडर की कीमत में काफी गिरावट आई, जिसके कारण दुग्ध महासंघ को काफी नुकसान हुआ। हमारे सामने दो ही विकल्प थे। एक यह कि या तो हम किसानों से कलेक्शन कम कर दें या फिर नुकसान सहंे, पर हमने नुकसान बर्दाश्त

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