मनमानी फीस वसूलने पर प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई की मांग, मंत्री ने दिया आश्वासन

रायपुर। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही राजधानी समेत प्रदेशभर के निजी स्कूलों में अभिभावकों की जेब कटाई शुरू हो गई है। निजी स्कूल फीस में मनमानी बढ़ोतरी के साथ पाठ्यपुस्तकों से इतर अन्य किताबों और ड्रेस के लिए भी कमीशन का खेल जमकर फल-फूल रहा है।

पत्रिका टीम ने राजधानी के ही कुछ नामी स्कूलों में वस्तुस्थिति का जायजा लिया, जहां विवरण पुस्तिका के साथ पाठ्यवस्तु के इतर कुछ किताबों और ड्रेस सहित अन्य सामग्रियों की सूची भी दी गई, साथ ही इनकी खरीदी के लिए दुकान भी निर्धारित थी। इसके अलावा किसी अन्य फर्म में यह किताबें और ड्रेस सहित अन्य सामग्रियां मिलती ही नहीं हैं।

इतना ही नहीं सिलेबस के इतर जिन किताबों की मांग संस्थान द्वारा की जाती है, उनके लिए स्कूलों में न तो अलग से कक्षाएं लगती हैं और न ही इन विषयों की परीक्षाएं होती हैं। बीते कुछ वर्षों से इन स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले पालकों से भी इस संदर्भ में बात की, जिसमें उन्होंने बताया कि मोरल साइंस, सामान्य ज्ञान जैसे विषयों की किताबें तो हर वर्ष मंगाई जाती हैं, लेकिन न तो इसके लिए अलग से कक्षाएं लगाई जाती हैं और न ही इनकी परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।

मात्र सीमित परीक्षाएं होती हैं

शासन द्वारा निर्धारित सिलेबस के अनुसार कक्षा पहली और दूसरी में 3, तीसरी-चौथी में 4, पांचवीं में 5 विषय व छठवीं से आठवीं में 7 विषयों की पढ़ाई और परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। जबकि निजी स्कूलों में इन विषयों के अतिरिक्त कई अन्य विषयों को भी शामिल किया जाता है, जबकि समय पीरियड अधिकतम 7 तक ही सीमित रहते हैं। ऐसे में निजी स्कूल सामान्य ज्ञान सहित अन्य विषयों की किताबें लाने बच्चों और अभिभावकों पर दबाव डालते हैं, जबकि कक्षाएं और परीक्षाएं दोनों ही आयोजित नहीं की जाती हैं।

एनएसयूआई ने सौंपा ज्ञापन

निजी स्कूलों में मची लूट के खिलाफ पालक संघ के साथ-साथ अब छात्रसंघ ने भी मोर्चा खोल दिया है। एनएसयूआई (NSUI) की जिला कार्यकारिणी के सदस्यों ने स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह से मुलाकात कर उच्च शैक्षणिक संस्थानों की तर्ज पर फीस विनियामक आयोग के गठन की मांग की। उन्होंने मंत्री को बताया कि पिछली सरकार से भी कई बार मांग करने के बावजूद इसका गठन अब तक नहीं हो पाया। इस पर मंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया।

जिला शिक्षा अधिकारी जीआर चंद्राकर ने कहा, स्कूलों में निर्धारित पाठ्यक्रम के अलावा अन्य किताबों की आवश्यकता तो नहीं होती है। बच्चों को अतिरिक्त पाठ्यवस्तु के इतर ज्ञान बढ़ाने के लिए एेसा स्कूलों द्वारा किया जाता है। शिकायत मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई भी की जाती है।

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