समिति पहुंचने वाले किसान भी हाइब्रिड धान बीज की कर रहे मांग

बीज विकास निगम से मिलने वाले धान बीज से हो रहा मोह भंग

strongअंबिकापुर।/strong बीज विकास निगम के धान बीज की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल और उम्मीदों के अनुरूप पैदावार नहीं होने से किसानों का धान की संशोधित किस्मों से रुझान कम होने लगा है। परिणामस्वरूप सहकारी समितियों द्वारा भी अब हाइब्रिड धान बीज की किस्में उपलब्ध कराई जाने लगी है।

धान बीज के संशोधित किस्मों से समितियों का टर्न ओवर प्रभावित न हो, इसलिए समितियों ने बीज विकास निगम में पंजीकृत संस्थाओं से सीधे हाइब्रिड धान बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने लगी हैं। यदि समितियों द्वारा ऐसा नहीं किया गया तो उनका टर्न ओवर सीधे-सीधे प्रभावित हो सकता है और वे अपने व्यवसाय को किसी भी स्थिति में कम करना नहीं चाहती।

strong- पहले इन किस्मों पर था जोर</strongकुछ वर्षों पहले तक सहकारी समितियों में धान की संशोधित किस्मे आईआर-36, आईआर-64, 10-10 आदि की प्रचुर उपलब्धता होती थी। धान की इन किस्मों से भरपूर पैदावार भी होता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से बाजार में फैले हाइब्रिड धान बीज के कारोबार ने धान की इन संशोधित किस्मों की पूछपरख को कम कर दिया।

विभन्न कंपनियों के हाइब्रिड धान बीज से भरपूर पैदावार और इसकी मार्केटिंग के तरीके ने किसानों की मनोदशा को भी बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

strong-बीज विकास निगम से रुझान कम/strongकिसानों के खेतों की उपज को ही खरीद कर बीज विकास निगम द्वारा बीज के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। निगम में कई कंपनियां भी पंजीकृत हैं। इन कंपनियों से भी बीज की खरीदी होती है। पिछले कुछ वर्षों से निगम की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।

बीज विकास निगम द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले बीज से उम्मीद के अनुरूप उत्पादन नहीं होने, वेरायटी में अंतर के अलावा एक किस्म के बीज में दूसरे किस्म के मिश्रण जैसी कई शिकायतें सामने आनी शुरू हुई। परिणामस्वरूप बीज विकास निगम द्वारा उपलब्ध कराए बीज को लेकर किसानों का रुझान कुछ कम हुआ है।

strong-ठगे भी गए हैं सैकड़ों किसान/strongसरगुजा सहित पड़ोसी जिलों में हर वर्ष कुछ गांवों से शिकायत आती है कि समितियों से लिए गए बीज का उपयोग खेतों में किए जाने के बाद पैदावार नहीं हुई। पौधे तो बढ़े, बालियां भी आई, लेकिन उन बालियों में अनाज हुआ ही नहीं। हर वर्ष ऐसे सैकड़ों किसान प्रशासन के समक्ष जाकर मुआवजा व क्षतिपूर्ति का गुहार लगाते हैं।

इन सब कार्यों से अब न सिर्फ खुले बाजार बल्कि समितियों में पहुंचने वाले किसान भी विभिन्न कंपनियों के हाइब्रिड धान बीज की मांग करते हैं।

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