50 वर्षों से भी अधिक पुरानी रेल लाइन की मांग, अब जल्द होगी शुरू

मुंगेली।

पचास वर्षों से भी अधिक पुरानी रेल लाइन की मांग पूरी होने जा रही है। कटघोरा और मुंगेली के रास्ते कवर्धा से डोंगरगढ़ तक नई रेल लाइन का कार्य जल्दी ही शुरू होने की एक और बाधा दूर हो गई।

रेल मंत्रालय व राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट को अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इस संबंध में रेल मंत्रालय का प्रगतिमूलक पत्र छत्तीसगढ़ सरकार को मिल भी गया है। इस रेल लाइन की लंबाई करीब 277 किमी होगी। इस पर 4821 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ रेल कार्पोरेशन इसके लिए संयुक्त उपक्रम बनाने की तैयारी में जुट गया है, ताकि फंड और लोन की व्यवस्था की जा सके। इस प्रोजेक्ट को लेकर समाजसेवी और लंबे समय से रेलवे संघर्ष समिति के संदीप श्रीवास्तव ने मुंगेली पहुंचकर पत्रकारों से चर्चा की और कई विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।

-दो हिस्सों में बनेगी रेल लाइन

रेल मंत्रालय ने 277 किमी की इस पूरी रेल लाइन को दो हिस्सों में मंजूरी दी है। पहला हिस्सा कटघोरा से करताला तक 22 किमी का है। दूसरा 255 किमी का होगा जो करताला से शुरू हो कर मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक जाएगी। प्रशासनिक सारी औपचारिकता पूरी होने उपरांत इस वर्ष के अंतिम तक कार्य शुरू होने की प्रबल संभावना है।

अफसरों के अनुसार प्रोजेक्ट का अगले छह महीने में भूमिपूजन हो सकता है। हालांकि इससे पहले राज्य के रेल कॉपोर्रेशन और राज्य सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ेगा, क्योंकि प्रोजेक्ट पर होने वाले खर्च की व्यवस्था राज्य को ही करनी है।

-भूमि अधिग्रहण और दावा आपत्ति का दौर शुरू

हाल ही में स्थानीय अखबारों में प्रभावित गाँव और इलाको के नाम के साथ प्रभावित रकबे का प्रकाशन भी राजपत्र में किया गया है जिसमे दावा आपत्ति के लिए एक महीने का समय भी दिया गया है । इस समयावधि के भीतर कोई भी रेल लाइन सर्वे या अन्य किसी भी विषय पर एसडीएम के पास दावा आपत्ति कर सकता है।

-उसलापुर से जोड़ना है जरूरी

राजपत्र में प्रकाशित हुए गाँव के अनुसार ये रेल उसलापुर से होकर नही जाती दिख रही है जबकि यात्री गाड़ी के रूप में अगर उसलापुर नही जोड़ा जाता लगभग 20 किलोमीटर अधिक घूमना पड़ेगा साथ ही आवागमन में समय अधिक लगेगा अगर गनियारी से एक छोटी लाइन उसलापुर में जोड़ दी जाती है तो इस रूट में आने जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी सहूलियत रहेगी।

-मुआवजे और पुनर्वास नीति को लेकर भी है भ्रांतियां

इतने बड़े प्रोजेक्ट में रोजगार और नोकरियों को लेकर थोड़ी विसंगतियों की जानकारी हुई है, इसमे प्रभावित जमीन मालिको और स्थानीय लोगो को लेकर पुनर्वास और अन्य रेल्वे में सर्विस जैसे योजनाओं को हटाने की जानकारी मिल रही है जबकि इतने बड़े प्रोजेक्ट में ग्रुप डी की लगभग 2000 से अधिक की सर्विस निकलने की संभावना है।

जिसे भूमि अधिग्रहण में प्रभावित और स्थानीय लोगो को देने का प्रावधान है, परन्तु वर्तमान में इन योजनाओं को हटाकर केवल मुआवजा देने की बात कही जा रही है।

पीपीपी पर चल रहे कई प्रोजेक्ट्स

छत्तीसगढ़ में अभी तीन से अधिक बड़े रेल प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इनमें रावघाट और रेल कॉरिडोर मुख्य रूप से शामिल हैं। ये सभी बड़े प्रोजेक्ट राज्य सरकार पीपीपी मोड यानी पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप के जरिए बनवा रही है।

50 साल पुरानी मांग के अब पूरा होने की बढ़ी उम्मीद

छात्र युवा जोन संघर्ष समिति के रूप में जुड़े हुए सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस लाइन की मांग करीब 50 साल से की जा रही थी। इस परियोजना से राज्य के दो जिले कवर्धा और मुंगेली के साथ खैरागढ़ व कटघोरा समेत कई हिस्से रेल नेटवर्क में आ जाएंगे। दोनों जिले रेल नेटवर्क से फिलहाल पूरी तरह बाहर हैं। इस लाइन के चालू होने से राज्य की बड़ी आबादी को फायदा होगा।

व्यावसायिक इस्तेमाल की भी पूरी संभावना

इस रेल परियोजना से आम लोगों के साथ व्यावसायिक इस्तेमाल की पूरी संभावना है। कटघोरा तरफ से कोयला का परिवहन होगा साथ ही कवर्धा और राजनांदगांव क्षेत्र में बाक्साइट समेत अन्य खजिन भंडार हैं। रेल लाइन से इसके परिवहन में भी आसानी होगी।

दशकों तक किया गया संघर्ष

ललगभग 50 साल से भी अधिक समय से लगातार इस प्रोजेक्ट को लेकर संघर्ष करते बिलासपुर के संदीप श्रीवास्तव 9 मार्च 2009 को छात्र युवा जोन संघर्ष समिति के तरफ से 9 दिन की सायकल यात्रा में थे और मुंगेली में 10 मार्च को पहुचे थे जिसमें बड़ी संख्या में मुंगेली से भी युवाओं ने अपनी भागीदारी की थी।

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