शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज का नाम स्वर्गीय बलराम सिंह ठाकुर करने की मांग

रायपुर : राजनीति रिश्तों से बड़ी नहीं होती। स्वर्गीय बलराम सिंह ठाकुर का जीवन इस तथ्य को चरितार्थ करता है। उनके सुपुत्र डॉक्टर अखिल सिंह के नज़दीकी होने के नाते मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने और समझने का अवसर मिला विशेषकर जब वे 2003-08 के दौरान तखतपुर के विधायक और मेरी माँ के विधानसभा क्षेत्र कोटा अंतर्गत रतनपुर-स्थित माँ महामाया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे।

13 वर्ष पहले सितम्बर 2006 में अकलतरा-बलोदा में भूख से मरे फ़ोटो बाई के बच्चों से मिलने वो मेरे साथ गए थे: अपने वादे के अनुसार उन्होंने इस मामले में न केवल सरकार को घेरा बल्कि विधान सभा को चलने भी नहीं दिया। उस दौरान आप कांग्रेस विधायक दल के उप-नेता थे।

राजनीति में पारम्परिक प्रतिद्वंदी भी उनका नाम आते ही अपने मनभेद मिटा देते थे। इसका प्रमुख कारण था कि वे सभी के सम्मान का ध्यान रखते हुए, बड़ी बेबाकी से अपनी बात करते थे। पहले से कहीं ज़्यादा आज- जब देश और प्रदेश की राजनीति में बदले की भावना और आपसी-कटुता चरम पर है- ऐसे महापुरूषों की छत्तीसगढ़ को आवश्यकता है। उनकी कमी हमेशा खलेगी।

आज उनकी तेरवीं के दिन, मैं उनको नमन करते हुए अपने परिवार और पार्टी की ओर से श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ। साथ ही सरकार से अनुरोध करता हूँ कि उनके प्रदेश को अविस्मरणीय योगदान के परिपेक्ष में तखतपुर स्थित शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज का नामकरण स्वर्गीय बलराम सिंह ठाकुर के नाम पर किया जाए ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ हमेशा उनसे प्रेरणा लेती रहे।

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