ब्रेन-डेड होने के बावजूद इस महिला ने बचाई छह और जिंदगियां

थेन्नुर में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है | एक महिला ने इस दुनिया से जाते - जाते एक बच्ची को जन्म देने अलावा छह और लोगो को जिंदगी दे गई

त्रिची: थेन्नुर में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है | एक महिला ने इस दुनिया से जाते – जाते एक बच्ची को जन्म देने अलावा छह और लोगो को जिंदगी दे गई | त्रिची के महात्मा गांधी मेमोरियल गवर्नमेंट हॉस्पिटल (एमजीएमजीएच) में 25 साल की इस महिला के ब्रेन डेड होने के बाद उसके ऑर्गन्स डोनेट किए गए। धनलक्ष्मी नाम की यह महिला अस्पताल की पहली ऑर्गन डोनर बनी है।

थेन्नूर की रहने वाली ए धनलक्ष्मी को 7 मार्च की सुबह अस्पताल लाया गया था। वह 34 सप्ताह की गर्भवती थीं और डॉक्टरों के मुताबिक सीटी स्कैन में उनके ब्रेन डेड होने का पता चला। हाई ब्लड प्रेशर के चलते उनके दिमाग की नस फट गई थी।

बच्चे को बचाने के लिए डॉक्टरों ने उन्हें सी-सेक्शन पर रखा इसके बाद शाम को उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। अगले पांच दिन तक इलाज के बाद बाद यह पक्का हो गया कि महिला को बचाया नहीं जा सकता।

महिला के परिवार ने अंगदान का फैसला किया और इसके बाद डॉक्टरों ने आगे की प्रक्रिया शुरू की। कई डॉक्टरों की एक टीम ने ऑर्गन डोनेशन की तैयारी की और महिला के हृदय से लेकर लीवर और किडनी तक अन्य मरीजों को डोनेट किया गया है।

महिला के हार्ट को एयरलिफ्ट करके चेन्नै में एक व्यक्ति को लगाया गया और लीवर भी त्रिची में एक युवक को लगाया गया। महिला की दोनों किडनियां और आंखें भी दान की गईं। अस्पताल की ओर से यह अपनी तरह का पहला मामला था जब एक महिला के कई ऑर्गन डोनेट किए गए।

बताते चलें, ब्रेन डेड होने के बाद दिमाग काम करना बंद कर देता है और अंदरूनी अंग काम करते रहते हैं। ऐसे में व्यक्ति को मृत माना जा सकता है और उसके दोबारा ठीक होने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। ऐसे में ऑर्गन डोनेट किए जा सकते हैं।

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