मुख्यमंत्री के फटकार के बावजुद पीएचक्यू में 5 से 6 साल से पदस्थ पुलिस वर्दी की आड़ में मार्केटिंग करने वाले को नहीं हटाया…

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में बढ़ रहे अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री और अवैध गांजा व शराब तस्करी के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस प्रशासन को जमकर फटकार लगाई थी। साथ ही एक ही स्थान पर 3 साल से पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण के आदेश भी दिए गए थे। इसके अलावा पी एच क्यू से डीजीपी डीएम अवस्थी को भी हटा दिया गया। बावजूद इसके पीएचक्यू में 5 से 6 साल से पदस्थ पुलिस वर्दी की आड़ में मार्केटिंग करने वाले मार्केटिंग किंग को नहीं हटाया गया।

पी एच क्यू के सीआईडी शाखा में पदस्थ एक अधिकारी जो अपने पत्नी के नाम से एमवे में जुड़े हुए हैं उन्होंने पूरे सीआईडी विभाग को मार्केटिंग सेक्टर में बदल कर रख दिया है और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर जबरदस्ती इसमें जुड़ने का दबाव किस हद तक बनाते हैं यह बात भी किसी से छुपी हुई नहीं है। जिसका एक उदाहरण तो आप सभी देख ही चुके हैं अंजना सहिस के रूप में, जिसे इस हद तक प्रताड़ित किया गया और मारने की धमकी दी गई कि उसे मजबूरन यूपी सरकार की शरण में जाना पड़ा।

बता दे सीआईडी विभाग में कई फाइलें ऐसी हैं जो अब तक खुली नहीं! चिटफंड और आदिवासी प्रकरण फिर से चल रहा है लेकिन उस मार्केटिंग किंग के नाम से पी एच क्यू में बैठे अधिकारी को कोई मतलब ही नहीं। सरकार के महत्वाकांक्षी योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं लेकिन उसके बावजूद भी उस अधिकारी की केवल एक ही ड्यूटी है अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को जबरदस्ती एमवे में जुड़ने के लिए दबाव बनाना और जो कर्मचारी उनके आदेशों को ना माने उन्हें इस हद तक प्रताड़ित करना कि वह नौकरी छोड़ने पर ही मजबूर हो जाए।

एक हिसाब से देखा जाए तो रायपुर पी एच क्यू में कर्तव्यों के नाम पर उल्टी गंगा बहती है। बाकी कर्मचारियों पर ढाई साल में स्थानांतरण करने की योजना लागू होती है। लेकिन, अधिकारियों पर जो एक ही स्थान पर कई सालों से जमकर सरकारी पैसा ले रहे हैं और अपने विभाग को मार्केटिंग जोन में बदलकर अपना व्यक्तिगत मुनाफा कमा रहे हैं उन पर इस तरह का कोई नियम लागू नहीं हुआ।

यह बात स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री की नाराजगी की वजह से ही महा निरीक्षक हटाए गए लेकिन आखिर क्यों मार्केटिंग अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाराजगी भी नहीं हिला पाया? क्या मार्केटिंग किंग मुख्यमंत्री को एक बड़ा रकम चढ़ावा चढ़ाते हैं जो सीएम साहब उन पर मेहरबान है? इस सवाल का वक्त आने पर जवाब मिल ही जाएगा।

तो वहीं रायपुर यातायात द्वारा भी मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना हो रही है। यातायात एएसपी द्वारा भी कई सालों से एक ही स्थान में जमे हुए अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि प्रदेश में अवैध तस्करी करने वालों पर लगाम नहीं लग पा रहा है।

प्रदेश सरकार को कहीं ना कहीं इस बात का अंदेशा है कि दूसरे राज्यों से अवैध मादक पदार्थों गांजा और शराब की तस्करी करने वालों को प्रदेश पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। कई वर्षों से एक ही स्थान में पदस्थ होने के चलते उनकी तस्करों से पहचान है और उनकी मिलीभगत से ही यह तस्करी हो रही है।

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