धान की अधिक उत्पादन एवं पोषण देने वाली किस्में विकसित करें कृषि वैज्ञानिक: राज्यपाल

परिवर्तनकारी धान प्रजनन पर तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

रायपुर. राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कृषि वैज्ञानिकों से आव्हान किया है कि वे छत्तीसगढ़ की जनता को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए धान की अधिक उत्पादन और ज्यादा पोषण देने वाली नई किस्में विकसित करें। उन्होंने नवीन किस्मों के विकास तथा उन्हें किसानों तक पहंुचाने मंे लगने वाली लगभग पंद्रह वर्ष की अवधि को घटाकर पांच से छह वर्ष तक सीमित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने इसके लिए पादप प्रजनन की आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करने का आव्हान किया।

उइके आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर एवं अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला फिलिपींस के संयुक्त तत्वावधान में 19 से 21 अक्टूबर तक परिवर्ततनकारी चावल प्रजनन (ट्रान्सफाॅर्मेटिव राईस ब्रीडिंग) पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ कर रहीं थीं। कृषि महाविद्यालय, रायुपर के सभागार में आयोजित शुभारंभ समारोह में धरसींवा विधायक श्रीमती अनिता योगेन्द्र शर्मा, मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। राज्यपाल सुश्री उइके ने इस अवसर पर धान प्रजनन तकनीक पर केन्द्रित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।

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