छत्तीसगढ़

बुद्धि का विकास हो अवकाश नहीं, राजयोग से ही बुद्धि दिव्य बनती है

दीपक वर्मा

राजिम(गरियाबंद)।

एक अच्छी सफलता शांत मन ,स्थिर चित्त पर निर्भर करती है।आप चाहे स्कूल में कितनी भी मेहनत करते हैं। मेहनत से ज्यादा आपके सोचने के तरीके पर सफलता आधारित होती है। आज मन नकारात्मक होने के कारण ईर्ष्या, दोष ,बदला लेना, अनुमान ,शंका, चिंता के कारण मनअशांत व ज्यादा सोच विचार करने वाला बन गया। जिसके कारण बुद्धि सही निर्णय नहीं ले पाती है।बुद्धि की शक्ति खत्म होती जा रही है।

याददास्त भी कमजोर हो जाती है।यह विचार इंदौर से पधारे धार्मिक प्रभाग के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्थानीय शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजिम में 525 छात्राओ को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने आगे कहा कि आज की शिक्षा से बुद्धि का विकास के बजाय अवकाश ज्यादा हो गया है। बुद्धि जड़ हो गई है, बुद्धि का पतन हो गया, निष्क्रियता बढ़ गई।

राजयोग के माध्यम से ही आंतरिक शक्तियों का विकास होने से चरित्र निर्माण होता है।स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है कि हम ऐसी शिक्षा चाहते हैं जिससे मानव का सर्वांगीण विकास हो, मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि हो, बुद्धि का विस्तार हो जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

समस्याओं व बाधाओ में विचलित के बजाय अचल स्थिर रह सके ।कार्यक्रम के आरम्भ में विद्यालय प्राचार्य कृष्णकांत ने बताया कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन व ध्यान का बड़ा महत्व है। प्रत्येक दिन ध्यान का अभ्यास करने से मन शक्तिशाली ,शांत होता है ।

विवेकानंद ने भी राजयोग पर हमारा ध्यान आकर्षित कराया। संस्था की ब्रह्मा कुमारी राजकुमारी ने संस्था का परिचय दिया। संस्था विश्व में राजयोग के माध्यम से शांति, एकता, प्रेम स्थापना के कार्य में विगत 83 वर्षों से निस्वार्थ रीती से कार्यरत है। आरम्भ में विद्यालय शिक्षक संतोष शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन कविता के माध्यम से किया।

सभी का स्वागत माला व चंदन के टीके से किया और अंत में आभार प्रकट करते हुए बताया कि ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ है हमें ज्यादा इंफॉर्मेशन इकट्ठे करने के बजाय आंतरिक विकास पर ध्यान देना चाहिए जो कि ध्यान से ही संभव है। बच्चों में बुद्धि का विकास मन की एकाग्रता के लिए राजयोग एक सशक्त साधन है। कार्यक्रम में विवेक शर्मा ,जगन्नाथ साहू, विश्व कुमार यदु ,नीरा तिवारी ,रंजन साहू ,किरण शर्मा और अन्य टीचर उपस्थित थे ।

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