कुत्ते के भौंकने से तंग आकर यहां लोग करते हैं ऐसा काम

एक शख्स अपने कुत्ते के भौंकने से परेशान था। बेजुबान जानवर की आवाज इसे इतनी कर्कश लगी कि वह उसे बाजार ले गया। यहां सड़क किनारे एक तथाकथित जानवरों का डॉक्टर बैठता है जिसका पेशा कुत्तों को गूंगा बनाना है।

क्लीनिक के नाम पर बस एक कुर्सी, एक बेंच, चंद औजार और एक असिस्टेंट है। महिला ने डॉक्टर को अपनी परेशानी बताई तो उसने कुत्ते को बेंच पर बैठाया और उसकी एक टांग में एनेस्थेसिया की सूई दे दी। इंजेक्शन लगने के बाद कुत्ते की हालत अधमरी हो गई। वह हिल-डुल नहीं पा रहा था। इसके बाद उस डॉक्टर ने कुत्ते के ऊपरी और निचले जबड़े में तार बांध दिया और महिला असिस्टेंट से उसे खींचने कहा ताकि कुत्ते का मुंह खुल जाए।

जालिम डॉक्टर ने चिमटे जैसा एक औजार मासूम जानवर के गले में डाला और उसका वोकल कॉर्ड नोंच डाला। अब यह कुत्ता भौंक तो सकेगा लेकिन उसके भौंकने पर कोई आवाज नहीं आएगी। वह गूंगा हो चुका था। कतार में इस जैसे और भी जानवर खड़े थे जो अपने साथ बदसलूकी होने का इंतजार कर रहे थे।

डॉक्टर साहब इस सेवा के लिए करीब 400 से 900 रुपये वसूलते हैं। न तो इनके पास डॉक्टरी करने का लाइसेंस है, न ही इनकी महिला असिस्टेंट के पास। उन्होंने एक पेट शॉप में काम करने के दौरान डिवोकलाइजेशन का ‘हुनर’ सीखा था। और तो और ये जनाब एक ही औजार, बिना ढंग से साफ किये, कई कुत्तों की सर्जरी में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि अब इनके खिलाफ जांच चल रही है।

वहीं, इनके ग्राहकों का कहना है कि वह अपने कुत्ते के साथ ऐसा व्यवहार उसकी भलाई के लिए करते हैं। एक ने तो यह तक कह डाला कि पड़ोसियों को उसके डॉगी की आवाज अच्छी नहीं लगती थी। इसलिए उसने फैसला किया कि कुत्ते को सड़क पर लावारिस छोड़ने से अच्छा है कि वह उसे गूंगा बनाकर अपने ही पास रखे।

ताज्जुब है! अगर लोगों को कुत्ते के साथ मजबूरी में ऐसा सुलूक करना ही पड़ता है तो कम से कम उसे अच्छे अस्पताल तो ले जाते, यूं पैसे बचाने के लिए झोला छाप डॉक्टर के पास ले जाकर उनकी जान जोखिम में तो न डालते!

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