छत्तीसगढ़

मादा हाथी की दर्दनाक मौत पर कटघोरा DFO निलंबित, रेंजर पर मेहरबानी

अरविंद शर्मा:

कटघोरा: कोरबा जिला के ब्लाक पोड़ी उपरोड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुलहरिया में एक मादा हाथी की हुई दर्दनाक मौत पर वन विभाग की घोर लापरवाही का खामियाजा कटघोरा वन मण्डलाधिकारी डी डी संत को चुकाना पड़ा। छत्तीसगढ़ शासन ने वन विभाग की लापरवाही को देखते हुए संत साहब को निलंबित कर दिया है।

दरअसल मामला कुछ इस प्रकार है कि कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत वन परिक्षेत्र केंदई के ग्राम कुलहरिया में एक मादा हाथी दलदली छेत्र में जा पहुँचा और वह उस दलदल में बुरी तरह से फस गया था। जब वन विभाग को इस बात की सूचना मिली तो विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे।

मादा हाथी को फसे देख वन विभाग के अधिकारियों ने भी घटना को महज हल्के में लिया, आधुनिक उपकरण होते हुए भी केवल तमाशबीन बनकर केवल खानापूर्ति की गई और मादा हाथी के लिए खाने तक की व्यवस्था नही की गई।

जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हाथी ने आखिरकार दम तोड़ा

करीबन 48 घण्टे से ज्यादा समय तक जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हाथी ने आखिरकार दम तोड़ दिया। इस पूरी घटना को लेकर जब मीडिया यहाँ के स्थानीय निवासियों से रूबरू हुई तो जानकारी सामने आई कि हाथी को बड़ी आसानी से बचाया जा सकता था पर हमारी मदद नही ली गई।

ग्रामीणों ने ये भी बताया कि वन विभाग से घटना स्थल पहुंचे अधिकारी केवल मूकदर्शक बने हुए दृश्य को निहार कर केवल खानापूर्ति कर रहे थे। हाथी को सकुशल निकालने के लिए जब ग्रामीणों ने हाथ बढ़ाया तो उन्हें डरा धमका कर भगा दिया गया।

अन्ततः दर्दनाक परिस्थितियों से संघर्ष कर रहे मादा हाथी ने दम तोड़ दिया।वन विभाग की लापरवाही उजागर होते ही शासन ने मण्डलाधिकारी डी डी संत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

अब सवाल ये उठता है कि क्या इस पूरी लापरवाही में केवल संत साहब ही दोषी है, मोके पर पहुँचे रेंजर अश्वनी चौबे जो की मौके पर रहकर भी केवल तमाशबीन बन कर महज 48 घण्टो तक केवल खानापूर्ति करते रहे हैं।

आज आधुनिक उपकरणों के होते हुये भी विभाग समय पर उनका सदुपयोग नही कर पा रहा है जो कि लापरवाही के साथ साथ विभाग की लचर व्यवस्था पर भी सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

पूरा गांव हाथियों के आतंक से दहशत में, नही है सुरक्षा के इन्तजाम

पूरा कुलहरिया गांव इन दिनों हाथियों के आतंक से थर्राया हुआ है सभी ग्रामीण भय के आगोश में समा गए हैं ग्रामीण पूरी रात भर रतजगा कर जान बचाने को मजबूर हैं विभाग से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिये पुख्ता इन्तजाम तक नही है।

यहाँ तक कि पूरा गांव हाथी प्रभावित क्षेत्र बन चुका है लेकिन विभाग की तरफ से ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए किसी भी तरह के उपकरण तक प्रदान नही किये गए हैं।कई घरों को हाथी नुकसान पहुँचा चुके हैं और ग्रामीण पूरी रात पहरा देकर जान बचाने को मजबूर हैं आखिर कब तक ग्रामीण विभाग की लापरवाही और लचर व्यवस्था की भेंट चढ़ते रहेंगे।

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