कन्नौज लोकसभा सीट पर डिंपल यादव का कब्जा, महागठबंधन से रोचक हुआ मुकाबला

साल 2000 के उपचुनाव में यहां से अखिलेश यादव विजयी हुए

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने अपना कब्जा जमकर रखा हुआ है. वहीं साल 2014 में मोदी लहर में बीजेपी इस सीट को बचाने में कामयाब हुई थी. लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव 2019 में इस बार यूपी में हुए महागठबंधन से मुकाबला रोचक हो गया है.

साल 2014 के समीकरण

साल 2014 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव पर लोगों ने यहां भरोसा किया और लोकसभा तक पहुंचाया. बीजेपी के सुब्रत पाठक यहां दूसरे, बीएसपी के निर्मल तिवारी तीसरे और आम आदमी पार्टी इमरान बिन जफर चौथे स्थान पर रहे थे.

मोदी लहर के बावजूद डिंपल यादव ये सीट सपा के नाम करने में कामयाब रहीं. हालांकि डिंपल यादव और बीजेपी के सुब्रत पाठक के बीच मतों का बहुत अंतर नहीं था. डिंपल यादव को 4,89,164 वोट मिले थे जबकि, सुब्रत पाठक को 4,69,257 मिले थे.

ऐसा है राजनीतिक इतिहास

साल 1967 में कन्नौज में हुए चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस को हराया था. साल 1971 के चुनाव में कांग्रेस और 1977 में यहां भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की थी. साल 1984 के चुनाव में कांग्रेस की शीला दीक्षित ने बड़ी जीत हासिल की थी और कन्नौज से पहली महिला सांसद बनीं थी.

साल 1996 में पहली बार यहां बीजेपी ने जीत दर्ज की. लेकिन, साल 1998 से लेकर साल 2014 से सीट सपा के ही नाम रही है. साल 1998 में सपा नेता प्रदीप कुमार यादव, साल 1999 में यहां से मुलायम सिंह यादव सांसद चुने गए थे. साल 2000 के उपचुनाव में यहां से अखिलेश यादव विजयी हुए.

इसके बाद साल 2004 और 2009 में भी उन्होंने इसी सीट से चुनाव लड़ा. साल 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तब उन्हें कन्नौज की सीट से त्यागपत्र देना पड़ा और उनकी जगह उनकी पत्नी डिंपल यादव इस सीट पर खड़ी हुईं और यहां से जीतकर लोकसभा पहुंची.

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