छत्तीसगढ़

पुलिस महानिदेशक का आदेश : वित्तीय कंपनियों द्वारा विधि विरुद्ध तरीके से वाहन कब्जे की कार्यवाही की जाए

बैंक गुण्डों की भर्ती कर जबरदस्ती कब्जा नहीं ले सकता।

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

प्रायः यह देखने में आ रहा है कि, वित्तीय कंपनियों द्वारा वाहन इत्यादि के लिए लोन दिया जाता है तब किसी व्यक्ति के द्वारा वाहन क्रय आदि के लिए लोन लिया जाता है और लोन के रकम की किस्त जमा नहीं किये जाने पर वित्तीय कंपनियों के द्वारा विधिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं करते हुए बलपूर्वक अपने कर्मचारी के माध्यम से वाहन को जब्त कर लेते हैं , जो कि पूर्णतः विधि विरूद्ध है।

उक्त संबंध में माननीय उच्च न्यायालय केरल के द्वारा व्ही 0 ए 0 जॉर्ज व अन्य विरूद्ध अब्राहम अगस्टीन व अन्य ( 2012 कि.ल.ज. 3355 ) के प्रकरण में बिना दिवानी न्यायालय या मध्यस्थता करार के तहत सहारा लेते हुए केता द्वारा भुगतान में चूक होने पर जबरदस्ती उससे कब्जा से वाहन को ले लेना धारा 394 भादवि के तहत् अपराध होगा उल्लेखित किया है।

पुलिस महानिदेशक का आदेश : वित्तीय कंपनियों द्वरा विधि विरुद्ध तरीके से वाहन कब्जे की कार्यवाही की जाए

बैंक ऑफ इण्डिया के द्वारा जारी दिशा – निर्देश

माननीय उच्चतम न्यायालय सिटी कॉर्प मारूती फायनेंस लिमिटेड विरूद्ध व्ही 0 विजय लक्ष्मी ( ए.आई.आर. 2012 एस.सी. 509 ) में भी उल्लेखित किया है कि कोई भी वित्तीय कम्पनी बल पूर्वक वाहन जब्त नहीं कर सकते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया के द्वारा जारी दिशा – निर्देश और केता व कम्पनी के मध्य हुए इकरारनामा के अनुसार ही वसूली कार्यवाही की जानी चाहिए।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आई 0 सी 0 आई 0 सी 0 बैंक लिमिटेड विरुद्ध प्रकाश कौर व अन्य ( 2007 ( 2 ) एस.सी.सी. 711 ) के प्रकरण में यह धारित किया गया है – ” रिकवरी एजेंट के भर्ती का तौर तरीका को हतोत्साहित करने की आवश्यता है , बैंक को कानून की प्रक्रिया अपनाते हुए वाहन को जप्त करना चाहिए जबकि कर्जदार ने किस्तों के भुगतान में चूक की है न कि बाहूबल से। हमलोग इस देश में कानून के नियम से शासित हैं ! कर्ज की वापसी या वाहन की जब्ती कानूनी तरीके से ही की जा सकती है । बैंक गुण्डों की भर्ती कर जबरदस्ती कब्जा नहीं ले सकता । “

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