आपदा को बनाया अवसर! मरीजों से मोटी रकम लेकर DKS अस्पताल में करवा रहे सिटी स्कैन

निजी लैब के गोरखधंधे का पर्दाफाश

रायपुर: प्रदेश की राजधानी में कोरोना संक्रमण की बेतहाशा रफ्तार के बीच लोगों में सिटी स्कैन कराने की होड़ मची है, लेकिन सिटी स्कैन कराने के नाम पर एक बड़े गोरखधंधे का पर्दाफाश हुआ है। रायपुर के एक निजी लैब ने सिटी स्कैन कराने के नाम पर लोगों से पैसे लिए, लेकिन सिटी स्कैन रायपुर के डीकेएस सरकारी अस्पताल में कराया गया।

इसके बाद बाकायदा कई मरीजों को इकट्ठा कर निजी लैब के कर्मचारी उसे डीकेएस अस्पताल ले गए। वहां पर्ची कटवाए गए और उन सभी का सिटी स्कैन करवाया। इसके बाद वहां से सीटी स्कैन की फिल्म लेकर निजी लैब लाया गया और निजी लैब के लेटर पैड पर रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को थमा दिया गया।

ये पूरा मामला रायपुर के रूपरेला डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़ा है, जो डीकेएस अस्पताल के ठीक सामने मौजूद है। इस पूरे मामले में कई तरह की गंभीर अनियमितताएं सामने आई है। पहला ये कि कोविड-19 मरीजो के सिटी स्कैन के लिए सरकार ने 1800 रुपए की कीमत तय कर दी है, लेकिन इसी सीटी स्कैन के नाम पर रूपरेला डायग्नोस्टिक सेंटर ने मरीजों से 3500 वसूले। जबकि डीकेएस अस्पताल में सिटी स्कैन 1675 रुपए में किया गया है।

गंभीर खुलासा यह भी है कि रूपरेला डायग्नोस्टिक सेंटर के पास अपनी सिटी स्कैन मशीन है ही नहीं फिर भी वो धड़ल्ले से लोगों का सिटी स्कैन कर रहा है। आरोप यह भी लग रहा है कि रूपरेला डायग्नोस्टिक सेंटर के कर्मचारी की डीकेएस स्थित रायपुर रेडियोलॉजी सेंटर के कर्मचारियों से सांठगांठ हैं।

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