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सर्जरी की जगह मरीज को कर दिया डिस्चार्ज, अब अस्पताल को देना होगा 11.82 लाख का जुर्माना

देहरादून। समय पर मरीज को इलाज ना देने और परिजनों को लंबा-चौड़ा बिल थमाने पर उत्तराखंड हेल्थ डिपार्टमेंट ने एक अस्पताल पर 11.82 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

डिपार्टमेंट ने यह जुर्माना इसलिए लगाया है क्योंकि मरीज का इलाज अलट आयुष्मान योजना के तहत किए जाना था। इसके बावजूद अस्पताल ने मरीज की सर्जरी के लिए 2,39 लाख रुपए का एस्टिमेट बनाकर परिजनों को थमा दिया। अस्पताल की लापरवाही और सही समय पर इलाज ना मिलने के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ गई और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। डिपार्टमेंट ने अस्पताल को एक सप्ताह के भीतर जुर्माना राशि जमा कराने के आदेश भी दिए है।

क्या था मामला

यह मामला देहरादून के श्री महंत इंदिरेश अस्पताल का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कोटद्वार निवासी पिंकी प्रसाद को 18 जनवरी को चंद्रमोहन सिंह नेगी राजकीय बेस चिकित्सालय में भर्ती कराया था। गंभीर हृदय रोग की वजह से 21 जनवरी को पिंकी को श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में रेफर किया गया। यहां पर अस्पताल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित ने मरीज का परीक्षण कर इलाज शुरू किया।

इस दौरान मरीज को आईसीयू में रखा गया और डॉक्टर ने सीटीवीएस (कार्डियो थोरेक्स एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग से ओपिनियन लेने की सलाह दी। इस पर सीटीवीएस विभाग ने मरीज को ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता बताई। लेकिन, मरीज को फौरन उपचार देने की बजाए 29 जनवरी को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

परिजनों को थमाया लाखों का बिल

बता दें कि, मरीज को समय पर इलाज ना मिलने के कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों को सर्जरी का 2,36 लाख रुपए का एस्टिमेट दे दिया था, जबकि यह सर्जरी योजना में शामिल थी।

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद महिला के पति ने कोटद्वार तहसील पर धरना दिया व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इलाज के लिए अनुरोध किया। इस पर राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने सबूतों के आधार पर इसे अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन माना और अस्पताल पर 11.82 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

अस्पताल ने दी सफाई

इस संबंध में श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के सीनियर पीआरओ भूपेन्द्र का कहना है कि, मरीज सर्जरी लायक अवस्था नहीं थी। कुछ दिन के इलाज के बाद स्टेबल होने पर ही उन्हें डिस्चार्ज किया गया था।

लेकिन, मरीद दोबारा अस्पताल नहीं आईं। वहीं, खर्च का एस्टिमेट दिए जाने के बारे में अस्पताल की ओर से संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। मरीज के परिजन और अस्पताल प्रबंधन से मिले सबूतों के आधार पर राज्य स्वास्थ्य अभिकरण की कार्यकारिणी समिति की बैठक में अस्पताल पर 11.82 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

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