मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के पंचायती राज को मजबूत करने की मंशाओं पर भेदभाव का सेंध- राहुल योगराज टिकरिहा

बेमेतरा जिला पंचायत के सभापति व प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के सोशल मीडिया प्रभारी राहुल योगराज टिकरिहा ने मुख्यमंत्री के पंचायत प्रतिनिधियों के लिए किए गए घोषणाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा मुख्यमंत्री व पंचायत मंत्री को पत्र उन्होंने यह लिखते हुए प्रेषित किया कि पंचायती राज को मजबूती प्रदाय करने हेतु आपके द्वारा किये गए घोषणा हेतु आभार वहीं पंचायती राज को भेदभाव पूर्ण कमजोर करने के विषय में आपको संज्ञाणात्मक पत्र। जिसमें उन्होंने लिखा कि माननीय मुख्यमंत्री जी सर्वप्रथम आपके द्वारा पंचायती राज को मजबूती प्रदाय करने हेतु किये गए घोषणाओं हेतु पंचायत प्रतिनिधियों के ओर से साधुवाद, वहीं महोदय जी आपको संज्ञान में होगा की आपके ही शासन में लगातार द्वेषपूर्ण पंचायत प्रतिनिधियों पंच, सरपंच, जनपद सदस्य व जिला पंचायत के सदस्यों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। आपके राज में ही प्रोटोकॉल को नजरअंदाज कर भाजपा के सदस्यों का शिलालेख में नाम नहीं लिखा जाता। बेमेतरा जिला पंचायत की अध्यक्षा श्रीमती सुनीता साहू का कहीं पर भी नाम नहीं लिखा जाता। ऐसे सैकड़ों शिलालेख का आप स्वयं बेमेतरा में अनावरण किया है। क्या एक गरीब महिला होने की वजह से इनका नाम नहीं लिखा जाता या ये पंचायती राज को कमजोर करने की मंशा से किया जाता है। ये सभी उदाहरण आपके पंचायती राज को सुदृढ़ करने के घोषणाओं पर सिर्फ दिखावा नजर आता है। क्योंकि यहां “मानदेय नहीं मान की आवश्यकता है। यहां निधि की नहीं समानता की आवश्यकता है।”

बेमेतरा जिला पंचायत में पंचायती राज का गला घोंट रही भूपेश जी की सरकार

राहुल टिकरिहा ने आलोचना करते हुए बताया कि एक ओर पंचायती राज मजबूत करने का जुमला दिया जा रहा है। वहीं पूरे प्रदेश के सिर्फ बेमेतरा जिला पंचायत में वित्तीय वर्ष 2020-21 व 2021-22 के राशि का आबंटन में द्वेषपूर्ण राजनीति के चलते राशि आबंटन में रोक लगा हुआ है। जिससे कोई भी सदस्य अपने क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं कर पा रहे है। यहाँ पर पंचायत प्रतिनिधियों का गलाघोंटा जा रहा है। व सीधा-सीधा अधिकारों का हनन है। ऐसे ही मामले बहुत से जनपद व जिला पंचायत सदस्यों के साथ हो रहें हैं।

सरपंचों के अधिकारों का हनन घोषणा के पहले और आगे भी जारी रहेगा

राहुल ने पत्र में लिखा कि सरपंचों को केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त 15 वे वित्त का उपयोग मूलभूत व्यवस्था में खर्च की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गयी है। उन्हें जिला पंचायत या जनपद पंचायत के माध्यम से राज्य सरकार की विफल योजनाओं में वित्त उपयोग लगाने का आदेश दिया जाता है।
वही सरपंचों को लागत ₹20 लाख तक के कार्य करने के अधिकार को बढ़ाकर लागत ₹50 लाख करने की घोषणा कि है। अतः महोदय आपका आभार किंतु ध्यानाकर्षण कराना चाहूंगा की महोदय आज भी आपके 3 साल के कार्यकाल में किसी भी सरपंचों को 20 लाख रुपए तक के कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं मिली है। सारे कार्यों के लिए ऊपर से ठेकेदार तय हो जाते है। आप उदाहरण स्वरूप देख सकते हैं कि आपके सुगम सड़क योजना जिसकी अधिकांश लागत 20 लाख से नीचे होती है, किन्तु दुर्भाग्य हमारे बेमेतरा जिला व प्रदेशभर में इसका कार्य अधिकार किसी सरपंचो को नहीं मिला।

जिला व जनपद पंचायत में द्वेषपूर्ण राशि का आबंटन

सभापति लिखते है कि जिला पंचायत व जनपद पंचायत के सदस्यों के साथ दलगत राजनीति के तहत उनके अधिकारों का हनन किया जाता है। अधिकांश जगहों पर जहां अध्यक्ष कांग्रेस के बैठे हैं वहां पर भाजपा के सदस्यों को 15वें वित्त की राशि जो केंद्र से सरकार से आती है। उसका आबंटन भेदभाव के साथ किया जाता है। राहुल ने ध्यानाकर्षण कराते हुए कहा कि आपके गृह जिला दुर्ग के जिला पंचायत में भाजपा से संबंधित सदस्यों को केंद्र की 15वें वित्त स्वरूप करोड़ों के आबंटन में “शून्य” कर दिया गया है। क्या यही पंचायती राज की मजबूत बनाने की घोषणा है या मजबूर करने की नई परंपरा…??

पंचायत प्रतिनिधि दलगत से चुने नहीं जाते फिर भी आपके राज में सिर्फ भेदभाव है

पत्र में लिखा कि महोदय आपको विदिद है कि प्रत्येक पंचायत प्रतिनिधि चाहे वह पंच, सरपंच, जनपद हो या जिला पंचायत का सदस्य हो। वह दलगत निशान से हटकर ही निर्वाचित होता है। ऐसी स्थिति में आपके द्वारा पंचायती राज को मजबूती प्रदान करने के मंसूबों पर पानी फिरता हुआ नजर आता है, क्योंकि राजनीति और भेदभाव के चलते आपके सरकार में ही पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है…..पुनः आपके प्रयासों को मेरा साधुवाद।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button